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अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार: 4 से 9 जुलाई तक होगा आयोजन

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 से 9 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। सुरक्षा चिंताओं के चलते खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से उपस्थित नहीं होंगे। जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में और अधिक जानकारी।
 

जनाजे में लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे


जनाजे में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल होने की उम्मीद, जनाजे में मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नहीं दिखेंगे


तेहरान में, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद अमेरिका ने यह नहीं सोचा था कि यह युद्ध उसके लिए इतनी बड़ी चुनौती बन जाएगा। इस बीच, ईरानी प्रशासन ने खामेनेई के अंतिम संस्कार की जानकारी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि यह समारोह 4 से 9 जुलाई तक आयोजित होगा।


ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह अंतिम संस्कार देश के इतिहास में सबसे बड़े राजकीय समारोहों में से एक होगा। इसमें 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसको ध्यान में रखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। अंतिम संस्कार में 30 से अधिक देशों के नेता और 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत, पाकिस्तान, रूस और चीन जैसे कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है।


मशहद में अंतिम संस्कार की तैयारी

अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई को शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में संपन्न होगा। इस जनाजे में लाखों लोग शामिल होने की उम्मीद है। ईरान ने भारत सहित कई देशों के नेताओं को खामेनेई की अंतिम विदाई में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। उल्लेखनीय है कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई इस समारोह में सार्वजनिक रूप से उपस्थित नहीं होंगे, जो सुरक्षा चिंताओं के कारण है।


भारत में ईरानी प्रतिनिधि का बयान

भारत में ईरानी प्रतिनिधि, आयतुल्लाह हकीम इलाही ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं के चलते मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इस निर्णय का कारण इजरायली धमकियों और निगरानी के खतरों को बताया, जिससे सार्वजनिक उपस्थिति खतरनाक हो सकती थी। खामेनेई 28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध के पहले दिन एक हवाई हमले में मारे गए थे।