अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन के लिए नया CEO नियुक्त किया जाएगा
राम मंदिर में चढ़ावे की नई व्यवस्था
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद, चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन के लिए एक नई व्यवस्था की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत, मंदिर में एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जाएगी। CEO के चयन के लिए रिटायर जज जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की पहली बैठक में CEO की नियुक्ति के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि CEO के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति जो निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, आवेदन कर सकता है। CEO के लिए आवश्यकताएँ सरल हैं: आवेदक को ग्रेजुएट होना चाहिए और प्रबंधन तथा वित्त के क्षेत्र में 20 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। यदि आवेदक ने धार्मिक संस्थाओं में काम किया है, तो उसे प्राथमिकता दी जाएगी। दूसरी शर्त यह है कि आवेदक प्रैक्टिसिंग वैष्णव और रामभक्त होना चाहिए।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि यदि इस तरह के अनुभव वाले हजारों लोग आवेदन करते हैं, तो क्या होगा? आवेदन की अंतिम तिथि 18 जुलाई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि समिति के पास आवेदकों का बैकग्राउंड चेक करने का कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में आवेदन आमंत्रित करने का क्या अर्थ है? क्या यह केवल दिखावा नहीं है? क्योंकि यदि हजारों आवेदन आते हैं, तो उनकी छंटनी और बैकग्राउंड चेक करने में काफी समय लगेगा। इसलिए, समिति को अयोध्या के साधु-संतों, मठों के लोगों या मंदिरों के प्रबंधन से सिफारिशें मांगनी चाहिए। जानकारों का मानना है कि यह प्रक्रिया आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के किसी व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए है, जिसका सिफारिश उनके द्वारा की जाएगी। लेकिन इससे पहले, दिखावा करना भी आवश्यक है।