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अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ: स्थाई कैंप की स्थापना

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ की नई जानकारी सामने आई है। स्थानीय आदिवासी समुदाय ने आरोप लगाया है कि चीनी सैनिकों ने उनकी पारंपरिक भूमि पर कब्जा कर लिया है और उन्हें खेती करने से रोका है। इस मुद्दे पर डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें चीनी गतिविधियों की बढ़ती संख्या का उल्लेख किया गया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की गतिविधियाँ


अरुणाचल प्रदेश में स्थाई कैंप की स्थापना


भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक पुराना और जटिल मुद्दा है। चीनी सेना पर अक्सर भारतीय सीमा में घुसपैठ का आरोप लगता रहा है। हाल ही में, यह जानकारी सामने आई है कि चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले में अपने स्थाई कैंप स्थापित कर लिए हैं। यह तब सामने आया जब स्थानीय आदिवासी समुदाय के सदस्यों को उनकी पारंपरिक भूमि पर खेती करने से रोका गया।


आदिवासी समुदाय का ज्ञापन


हाल ही में, नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चाडर ने अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा, 'हमारी पारंपरिक भूमि, जहां हम पहले शिकार करते थे और अपने मवेशियों को चराते थे, अब चीनी सेना के कब्जे में है।' उन्होंने पांच स्थानों पर चीनी गतिविधियों का आरोप लगाया है।


चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियाँ


समुदाय ने आरोप लगाया है कि पिछले 10 से 15 वर्षों में टक्सिंग सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियाँ लगातार बढ़ी हैं। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य भारतीय भूमि पर अधिक से अधिक कब्जा करना है। आदिवासी संगठन के अनुसार, 2020 तक जिन क्षेत्रों पर उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उनमें से कई अब कथित तौर पर पीएलए के कब्जे में हैं।