अर्जेंटीना में नन्ही व्हेल्स की मौत से वैज्ञानिकों में चिंता
पैटागोनिया में नन्ही व्हेल्स की रहस्यमयी मौतें
ब्यूनस आयर्स: अर्जेंटीना के पैटागोनिया क्षेत्र में समुद्र तटों पर बड़ी संख्या में मृत नन्ही सदर्न राइट व्हेल्स (Southern Right Whale Calves) के शव मिलने से वैज्ञानिक समुदाय में चिंता का माहौल है। जून से चुबुत प्रांत के प्यूर्टो मैड्रिन और उसके आस-पास के तटीय क्षेत्रों में कई नवजात व्हेल्स के शव बहकर आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सामूहिक मौतें किसी गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण हो सकती हैं। हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि अभी बाकी है और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से विस्तृत जांच जारी है।
एरिसिपेलस बीमारी का संदेह
एरिसिपेलस बीमारी का गहराया शक, लिए जा रहे सैंपल
मरीन मैमल्स लेबोरेटरी (CONICET) के शोधकर्ता मारियानो कोसकारेला ने बताया कि इस सीजन में नन्ही व्हेल्स की मृत्यु दर सामान्य से काफी अधिक है। पशु चिकित्सकों और समुद्री विशेषज्ञों को 'एरिसिपेलस' नामक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी के फैलने का संदेह है। यह बैक्टीरिया समुद्री स्तनधारियों की त्वचा और जलीय पर्यावरण में पाया जाता है। वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या किसी पर्यावरणीय बदलाव के कारण यह बैक्टीरिया इतना आक्रामक हो गया है कि उसने नन्ही व्हेल्स के कमजोर इम्यून सिस्टम पर हमला कर दिया। मृत व्हेल्स के ऊतकों और समुद्र के पानी के नमूने लेकर फॉरेंसिक और माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की जा रही है।
ब्रीडिंग एरिया में संकट
दुनिया के सबसे बड़े ब्रीडिंग एरिया में मंडराया संकट
अर्जेंटीना का वाल्देस पेनिनसुला और प्यूर्टो मैड्रिन क्षेत्र सदर्न राइट व्हेल्स के लिए प्रमुख ब्रीडिंग और नर्सरी क्षेत्रों में से एक है। ये विशाल समुद्री जीव लगभग 17 मीटर लंबे और 40 टन वजनी हो सकते हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, 2025 में इस क्षेत्र में 2,110 व्हेल्स की गिनती की गई थी, जिनमें लगभग 800 बच्चे शामिल थे। इस साल अब तक 1,375 व्हेल्स दर्ज की गई हैं, जिनमें करीब 400 बच्चे हैं। इससे पहले, 2012 में भी यहां 113 व्हेल के बच्चों की रहस्यमयी मौतें हुई थीं, और अब एक बार फिर वही स्थिति सामने आ रही है।
इंसानी गतिविधियों का प्रभाव
इंसानी गतिविधियों से जुड़ाव नहीं, पूरी आबादी पर फिलहाल खतरा नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों का कारण प्राकृतिक और जैविक हो सकता है, लेकिन समुद्री प्रदूषण या इंसानी हस्तक्षेप की संभावना को भी नकारा नहीं गया है। हालांकि, चुबुत सरकार के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जो इसे इंसानी लापरवाही से जोड़े। शोधकर्ताओं का कहना है कि सदर्न राइट व्हेल की औसत उम्र लगभग 60 वर्ष होती है, इसलिए इस प्रजाति की पूरी आबादी के अस्तित्व पर तत्काल कोई बड़ा संकट नहीं है। फिर भी, भविष्य में व्हेल संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए इस रहस्यमयी बीमारी की जड़ तक पहुंचना आवश्यक है।