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अल-फलाह विश्वविद्यालय पर ED की कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। जांच एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की योजना बना रही है। इस मामले में विश्वविद्यालय के निर्माण में अवैध धन के उपयोग का संदेह है। पिछले वर्ष लाल किला विस्फोट के बाद से विश्वविद्यालय केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। ED ने इस मामले में विश्वविद्यालय के चेयरमैन को गिरफ्तार किया है और अब संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया पर विचार कर रही है।
 

फरीदाबाद में अल-फलाह विश्वविद्यालय पर ED की नजर

फरीदाबाद, हरियाणा: अल-फलाह विश्वविद्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, ED मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की योजना बना रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि विश्वविद्यालय की कई इमारतों के निर्माण में अवैध धन का उपयोग किया गया है।


जांच में यह पाया गया है कि फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में जिन फंड्स का इस्तेमाल हुआ, वे कथित तौर पर अवैध स्रोतों से आए हो सकते हैं। इसी आधार पर एजेंसी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह अल-फलाह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए एक बड़ा झटका होगा।


लाल किला विस्फोट से जुड़ा मामला: अल-फलाह विश्वविद्यालय पिछले वर्ष राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट के बाद से केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। इस घटना के बाद सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू हुई, जिसमें अल-फलाह समूह से जुड़े कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी सामने आए। इसके बाद ED ने विश्वविद्यालय और उससे संबंधित ट्रस्ट की गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू की।


ED यह भी देख रही है कि क्या विश्वविद्यालय के निर्माण और संचालन में प्रयुक्त धनराशि अवैध स्रोतों से प्राप्त की गई थी और उसे शिक्षण संस्थानों में निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की गई। एजेंसी का मानना है कि मामला केवल इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापक वित्तीय गड़बड़ियों और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े नेटवर्क की आशंका है।


इस मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को पिछले वर्ष नवंबर में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोप हैं। ED का दावा है कि अल-फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित कुछ शिक्षण संस्थानों ने कथित तौर पर छात्रों के साथ धोखाधड़ी की। एजेंसी के अनुसार, इन संस्थानों के पास शिक्षा देने के लिए आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी, फिर भी छात्रों से फीस वसूली गई।


जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों से एकत्र की गई राशि का उपयोग कथित तौर पर अन्य गतिविधियों और संपत्तियों के निर्माण में किया गया, जो PMLA के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अब विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।


फिलहाल, ED की ओर से कुर्की की तारीख या अंतिम आदेश को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि कुर्की की कार्रवाई होती है, तो इसका असर विश्वविद्यालय के संचालन के साथ-साथ छात्रों और कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। मामले को लेकर अल-फलाह विश्वविद्यालय या ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।