असम में बाढ़ से तबाही: 87 लोगों की मौत, लाखों प्रभावित
असम बाढ़ आपदा 2026
असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है। हर साल मानसून के दौरान राज्य के कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित होते हैं, लेकिन इस बार की तबाही ने हजारों परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब केवल पानी और सन्नाटा है। खेत, खलिहान, मवेशी, सड़कें और लोगों की वर्षों की मेहनत बाढ़ के पानी में समा गई है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, और हजारों लोग राहत शिविरों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। राज्य सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कई गांवों तक पहुंचना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
87 की मौत, 1.28 लाख से अधिक प्रभावित
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। सोमवार को जारी सरकारी बुलेटिन में बताया गया कि वर्तमान में 7 जिलों में लगभग 1.28 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। हाल ही में दर्ज दो नई मौतें सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिले में हुई हैं। प्रभावित जिलों में चराइदेव, शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, विश्वनाथ, जोरहाट और लखीमपुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगातार बारिश और नदियों के उफान आने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है।
घर डूबे, सड़कें टूटीं, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद
बाढ़ ने केवल लोगों के घरों को ही नहीं छीना, बल्कि उनकी आजीविका पर भी गहरा असर डाला है। ASDMA के अनुसार, 380 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं, जबकि 14,230.148 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबने से फसलें नष्ट हो गई हैं। धान और अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से यातायात बाधित है। बिजली और पेयजल आपूर्ति भी कई इलाकों में प्रभावित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नावों के सहारे आवाजाही कर रहे हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी मुश्किल हो गई है।
शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में ज्यादा तबाही
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 1,28,071 लोगों में सबसे अधिक 55,200 लोग शिवसागर जिले के हैं। इसके अलावा 34,050 लोग चराइदेव और 20,209 लोग जोरहाट जिले में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हजारों परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए 38 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां करीब 12 हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कई स्थानों पर लोगों ने राहत सामग्री की कमी की भी शिकायत की है।
धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर, अलर्ट जारी
गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ क्षेत्र में बहने वाली धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन ने नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नदियों, तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें। राज्य आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
नेपाली खुटी गांव की दर्दनाक कहानी
शिवसागर जिले का नेपाली खुटी गांव, जिसे कभी इलाके के सबसे समृद्ध डेयरी गांवों में गिना जाता था, आज बाढ़ की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बन गया है। लगभग 150 परिवारों वाला यह गांव पूरी तरह डेयरी व्यवसाय पर निर्भर था। बाढ़ के पानी ने घरों के साथ-साथ पशुओं के चारे, डेयरी ढांचे और लोगों की वर्षों की मेहनत को भी बर्बाद कर दिया। गांव के कई परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिन मवेशियों से उनकी आजीविका चलती थी, वे या तो बह गए या बीमार पड़ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी सामान्य स्थिति में लौटने में महीनों लग सकते हैं।
लोग बोले- 40 साल में ऐसा मंजर नहीं देखा
चराइदेव जिले के स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले 40 सालों में उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी। घर के अंदर करीब छह फीट तक पानी भर गया है। गांव में शायद ही कोई ऐसा घर बचा हो जो बाढ़ से प्रभावित न हुआ हो। ऐसी ही कहानियां राज्य के कई अन्य गांवों से भी सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी बाढ़ देखी है, लेकिन इस बार पानी का स्तर और तबाही दोनों अभूतपूर्व हैं। हालांकि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। हजारों लोग अपने घरों में लौटने की स्थिति में नहीं हैं।