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असम में बाढ़ से भारी तबाही: जानें स्थिति और राहत कार्य

असम इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है, जिससे भारी तबाही हुई है। 66 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग प्रभावित हैं। राहत कार्य में देरी हो रही है, जबकि मुख्यमंत्री ने बाढ़ के कारणों और स्थिति का आकलन किया है। जानें इस संकट के बारे में और अधिक जानकारी।
 

असम में बाढ़ का संकट

असम, पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य, इस समय भयंकर बाढ़ की चपेट में है। इस आपदा ने राज्य में व्यापक नुकसान पहुँचाया है, जिसमें कई लोगों के साथ-साथ सैकड़ों जानवरों की भी जान गई है। पिछले एक सप्ताह में कम से कम 66 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, और लगभग सात लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, सरकार अब तक 50,000 से अधिक लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुँचा पाई है। असम में यह बाढ़ ऐसी स्थिति उत्पन्न कर रही है, जो पहले कभी नहीं देखी गई।


सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र

ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिले इस बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन जिलों के निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसी बाढ़ नहीं देखी। हर दिन, सूखी जमीन पर भी पानी का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है।


बाढ़ की स्थिति का आकलन

असम के 12 जिलों में बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। 19 जुलाई को बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिसके बाद से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अब 12 जिलों के 856 गांवों में लगभग सात लाख लोग प्रभावित हैं। कई गांव, खेत और बड़े शहर जैसे शिवसागर पानी में डूब गए हैं.


मौतों की संख्या और राहत कार्य

सोमवार को असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 58 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें छह बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे स्थिति स्पष्ट होगी, यह संख्या बढ़ सकती है। 1.15 लाख से अधिक लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं, और NDRF, आर्मी, SDRF, फायर और इमरजेंसी सर्विसेज ने लगभग 4,455 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला है.


सहायता में देरी

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद, सरकार नाजिरा विधानसभा क्षेत्र के लगभग 30% और शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के 20% इलाकों तक राहत नहीं पहुँचा पाई है। बाढ़ का पानी घटने के साथ मिट्टी की परतें छोड़ रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में पहुँचने में कठिनाई हो रही है.


मौसम की घटनाएँ

असम सरकार ने बाढ़ का कारण 19 जुलाई को नागालैंड के मोन जिले में बादल फटने को बताया था। हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मोन में बादल नहीं फटा था, बल्कि एक घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश हुई थी, जिससे लैंडस्लाइड हुए और नौ लोगों की जान गई.


लोगों की सुरक्षित स्थानों की तलाश

शिवसागर जिले में बाढ़ से प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि नागालैंड के तीन जिलों और असम के चराईदेव में बारिश सामान्य से अधिक हुई थी, जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई.


बाढ़ से निपटने की चुनौतियाँ

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के पानी का तेजी से बढ़ना असामान्य है। ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ने से सहायक नदियों का पानी भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, असम और आसपास की नदियों में खुदाई के कारण कीचड़ बह रहा है, जिससे जल निकासी की क्षमता कम हो रही है.