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असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 को पारित किया

असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को पारित किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह विधेयक अब राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून लागू होगा। इस विधेयक में विवाह, तलाक, और संपत्ति के मामलों में सभी धर्मों के लिए समान नागरिक ढांचे का प्रावधान है। विपक्षी दलों ने इसके कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है।
 

असम विधानसभा का ऐतिहासिक निर्णय


असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि अब यह विधेयक राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।


विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद, मुख्यमंत्री ने इसे एक "ऐतिहासिक" कदम बताया और सदन के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।


उन्होंने कहा, "आज असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पारित किया है। मैं इस ऐतिहासिक कानून को अपनाने के लिए विधानसभा के सभी सदस्यों का धन्यवाद करता हूं।"


सरमा ने आगे बताया कि विधेयक पहले असम के राज्यपाल के पास जाएगा और फिर राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह कानून राज्य में लागू होगा।


उन्होंने कहा, "अब यह विधेयक महामहिम राष्ट्रपति जी की मंजूरी के लिए जाएगा। मंजूरी मिलते ही असम में इस कानून को पूरी तरह लागू किया जाएगा।"


मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कानून लागू करने से जुड़े छह से सात नियमों को अधिसूचित करना होगा, जिसके लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक होगी।


उन्होंने कहा कि नियम पहले से तैयार हैं, लेकिन विधेयक को मंजूरी मिलने से पहले उन्हें अधिसूचित नहीं किया जा सकता।


सरमा के अनुसार, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में तीन से छह महीने का समय लग सकता है। इसके बाद असम में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।


प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान नागरिक ढांचा लागू करने का प्रावधान है।


विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है।


भाजपा नीत असम सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है, जबकि विपक्षी दलों और कई संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों और छूटों को लेकर चिंता जताई है।