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अहमदाबाद बम धमाकों में दोषियों की सजा बरकरार, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में सभी 38 दोषियों की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ ही पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आदेश भी दिया गया है। यह निर्णय देश के सबसे बड़े आतंकवादी मामलों में से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के अन्य निर्देशों के बारे में।
 

अहमदाबाद में बम धमाकों का फैसला


अहमदाबाद: गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, अदालत ने सभी 38 दोषियों की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजे का आदेश भी दिया गया है। 17 साल पुराने इस मामले में अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही मृतकों के परिवारों और घायलों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह निर्णय देश के सबसे बड़े आतंकवादी मामलों में से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।


सजा का निर्णय

गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद बम धमाकों के मामले में 38 दोषियों की सजा को यथावत रखा। अदालत ने 38 दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा, जबकि 11 अन्य दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा में भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का निर्णय कायम रहेगा।


पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा

अदालत ने पीड़ित परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। फैसले के अनुसार, धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा, 200 से अधिक घायलों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का आदेश भी दिया गया है।


अहमदाबाद में धमाकों की घटना

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में लगभग 70 मिनट के भीतर 20 विभिन्न स्थानों पर 21 बम विस्फोट हुए थे। इन विस्फोटों में 56 लोगों की जान गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए। इस घटना ने पूरे शहर में आतंक फैला दिया और देशभर में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया।


आतंकी संगठन की जिम्मेदारी

जांच के दौरान यह सामने आया कि इन धमाकों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हुजी) ने ली थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक जांच अभियान चलाया और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई विशेष अदालत में हुई, जहां दोषियों को सजा सुनाई गई।


दिल्ली विस्फोट मामले की चर्चा

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट से संबंधित मामले की जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और कुछ आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है। हालांकि, यह मामला अहमदाबाद बम धमाकों से अलग है और इसकी सुनवाई अलग से जारी है।