आईआईटी बॉम्बे छात्र की आत्महत्या: प्रोफेसर डूला का इस्तीफा और विवाद
आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत का मामला
मुंबई। 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मृत्यु ने देश में हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, जिसके चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
घटना का विवरण
मिड सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन पर एआई का उपयोग करते हुए पकड़ा गया, जिसमें वह चैटजीपीटी से उत्तर खोज रहा था। प्रोफेसर डूला ने इसे संस्थान के अन्य स्टाफ को सूचित किया, जिसके बाद साहिल ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद प्रोफेसर डूला की चर्चा तेज हो गई है।
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का परिचय
प्रोफेसर डूला आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत हैं और पिछले एक दशक से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता में पावर सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन, कन्वर्टर कंट्रोल और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डूला ने 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, फिर 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एमटेक और 2007 में आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की। उन्होंने बेंगलुरु और हैदराबाद में भी कार्य किया है।
वर्तमान स्थिति
साहिल की मौत के बाद छात्रों ने आईआईटी बॉम्बे में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और डूला के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 21 सितंबर तक डूला को सस्पेंड कर दिया गया है। उनकी सस्पेंशन का मामला पुलिस जांच से अलग है।
आईआईटी बॉम्बे का बयान
संस्थान ने कहा कि वाकोडे को समझाया गया था कि परीक्षा की घटना का उनके करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने डूला का समर्थन किया है, यह कहते हुए कि उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई।
विवाद के विभिन्न पहलू
इस विवाद में तीन मुख्य पहलू शामिल हैं: परीक्षा की घटना, परिवार के आरोप और डूला के खिलाफ छात्रों का विरोध।