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आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई टली, अगली तारीख 30 अक्टूबर

आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अब अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। इससे पहले, अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया था, जिसमें आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया था। ईडी ने इस मामले में जांच शुरू की थी, जिसमें लालू यादव पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है।
 

सुनवाई की अगली तारीख

नई दिल्ली में आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी सहित नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अब इस मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।


कोर्ट का पूर्व निर्णय

इससे पहले, 11 सितंबर को दिल्ली की विशेष अदालत ने आईआरसीटीसी होटल घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया था। अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था।


जांच की पृष्ठभूमि

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत जांच शुरू की थी। यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई थी। सीबीआई ने तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।


लालू यादव पर आरोप

जांच में यह पाया गया कि लालू प्रसाद यादव ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने पुरी और रांची के रेलवे होटलों के विकास और संचालन का ठेका नियमों का उल्लंघन करते हुए मैसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को दिया। इसके बदले, मैसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को बेहद कम कीमत पर दो एकड़ भूमि हस्तांतरित की गई।


भूमि का स्वामित्व

यह कंपनी लालू यादव के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता के परिवार के स्वामित्व में थी। बाद में, इस भूमि और कंपनी का नियंत्रण नाममात्र की कीमत पर शेयर खरीदकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे यादव परिवार के पास भूमि का स्वामित्व आ गया। ईडी ने पीएमएलए की धारा 5 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 44 करोड़ 75 लाख रुपए की संपत्तियों को जब्त किया था, जिसे बाद में निर्णायक प्राधिकरण ने सही ठहराया।


अभियोजन शिकायत

ईडी ने इस मामले में 24 अगस्त 2018 को राउज एवेन्यू कोर्ट, दिल्ली के विशेष जज के समक्ष अभियोजन शिकायत दर्ज की थी।