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आगरा में नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़, करोड़ों की दवाएं जब्त

आगरा में एक दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने करोड़ों रुपये की नकली दवाएं बेचीं। जांच में पता चला कि फर्मों के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए थे। औषधि विभाग ने आठ महीने की जांच के बाद इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया। इस मामले में कई फर्मों की संलिप्तता सामने आई है, और अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के बड़े नेटवर्क के बारे में।
 

आगरा में नकली दवा का बड़ा मामला


उत्तर प्रदेश। आगरा में एक दवा सिंडिकेट ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर कई फर्में खोलकर नकली दवाओं का कारोबार किया। इन फर्मों के माध्यम से बिल तैयार किए गए और करोड़ों रुपये की नकली दवाएं बाजार में बेची गईं। हाल ही में इन फर्मों पर छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की गईं। हालांकि, अभी तक इस सिंडिकेट से जुड़े लोग जांच के दायरे में नहीं आए हैं। औषधि विभाग ने आठ महीने तक बिलों की जांच करने के बाद इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया।


औषधि विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 7 नवंबर को मनोज गुप्ता की फर्म की जांच की थी, जब उन्हें चोट, दर्द और सूजन के लिए दवाओं की नकली होने की आशंका हुई। यहां से बड़ी मात्रा में दवाएं कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेची गई थीं। जांच के दौरान, मनोज गुप्ता की फर्म 'अंशिका फार्मा' ने विभोर मेडिकल एजेंसी से दवाएं खरीदने के बिल प्रस्तुत किए। लेकिन जब विभोर मेडिकल एजेंसी की जांच की गई, तो उसने गुप्ता मेडिकल एजेंसी और हर्षित ट्रेडर्स से दवाएं खरीदने के बिल दिखाए, जो सभी फर्जी पाए गए।


जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी से भेजे गए चाइमोरल फोर्ट के नमूने भी कम गुणवत्ता वाले मिले। इसके अलावा, एसिलोक टैबलेट भी नकली पाई गई। जब इस बारे में पूछताछ की गई, तो वरदान मेडिकल एजेंसी ने इन दवाओं को विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदने का दावा किया। वहीं, टोरंट फार्मास्यूटिकल्स कंपनी ने इन दवाओं को बाजार में सप्लाई न करने की बात कही।


अतुल उपाध्याय, सहायक औषधि आयुक्त के अनुसार, जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी, विभोर मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, वीए एंटरप्राइजेज, युग फार्मा, रुद्रा एंटरप्राइजेज, शारदा फार्मा और आरएमडी फार्मा द्वारा चाइमोरल फोर्ट और मधुमेह की दवा टेल्मा एच के 10 डिब्बे खरीदे गए। इसी बैच के एक हजार नकली दवाओं के डिब्बे तैयार किए गए। इन फर्मों से बीस-बीस डिब्बों के बिल रिश्तेदारों की फर्म के नाम से काटे गए। इसके बाद इन दवाओं को थोक दवा और मेडिकल स्टोर पर बेचा गया, साथ ही कोलकाता, दिल्ली, हरियाणा और इंदौर में भी इनकी बिक्री की गई।


थोक दवाओं के लाइसेंस की जांच


जांच में यह भी पता चला कि थोक दवाओं के तीन हजार लाइसेंस हैं। औषधि विभाग की टीम ने इनका ब्योरा शपथ पत्र के साथ मांगा है। इसके अलावा, विभाग अपनी तरफ से भी जानकारी जुटा रहा है ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके। इन धांधलियों के पीछे दवा एसोसिएशन के पदाधिकारियों और औषधि निरीक्षकों की मिलीभगत की भी शिकायतें मिली हैं, जिनकी भी जांच की जा रही है। नकली दवा कारोबारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, और उन्होंने रियल एस्टेट में भी निवेश किया है। फव्वारा दवा बाजार में छापेमारी के बाद 40 प्रतिशत दुकानें बंद हैं, जिससे दवा बाजार में हलचल मची हुई है। हाल ही में मोहन ट्रेडर्स, कंबूटोला, और मनी मेडिकल मुबारक महल को सील कर दिया गया था। अब इन दुकानों को खोलकर टीम जांच करेगी, क्योंकि इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।