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आजम खान और अब्दुल्ला आजम को हाईकोर्ट से मिली जमानत, दो पैन कार्ड मामले में राहत

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिली है। कोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस निर्णय के बाद अब्दुल्ला की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, जबकि आजम खान की स्थिति अन्य लंबित मामलों पर निर्भर करेगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के फैसले के पीछे की कहानी।
 

आजम खान और अब्दुल्ला आजम को मिली जमानत


आजम खान और अब्दुल्ला आजम को मिली राहत: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में महत्वपूर्ण राहत मिली है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने गुरुवार को उनकी सजा को निलंबित करते हुए जमानत प्रदान की। हालांकि, कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका को अस्वीकार कर दिया। इस प्रकार, कानूनी राहत मिलने के बावजूद मामला पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। आजम खान की जेल से रिहाई अन्य लंबित मामलों की स्थिति पर निर्भर करेगी।


हाईकोर्ट का निर्णय

आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दायर की थीं। उन्होंने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी। अदालत ने 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने उनकी सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग को स्वीकार कर लिया है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसका अर्थ है कि अपील और पुनरीक्षण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


आजम को मिली थी 10 साल की सजा

इस मामले में, रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष की अपील पर मई 2026 में आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई, जबकि अब्दुल्ला की सात साल की सजा बरकरार रही। दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया था। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से दोनों को इस मामले में राहत मिली है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक न लगने के कारण इसे बरी होना नहीं माना जा सकता।


क्या आजम और अब्दुल्ला जेल से बाहर आएंगे?

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब्दुल्ला आजम की रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, आजम खान के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। उनके खिलाफ अन्य मामले भी लंबित हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और उत्तर प्रदेश विजिलेंस से जुड़े मामले शामिल हैं। यदि इन मामलों में उनकी हिरासत जारी रखने का कोई कानूनी आधार या वारंट प्रभावी है, तो उन्हें तुरंत रिहाई नहीं मिल सकती।


दो पैन कार्ड का मामला

यह मामला 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज शिकायत से संबंधित है। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे। एक कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज होने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन दस्तावेजों का उपयोग चुनावी पात्रता और अन्य प्रक्रियाओं में किया गया। आजम खान पर अपने बेटे के लिए गलत दस्तावेज तैयार कराने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था, जिसके खिलाफ उन्होंने कानूनी चुनौती दी।