आम आदमी पार्टी का पंजाब में सियासी संकट: विधायकों की बैठक का आयोजन
पंजाब में आम आदमी पार्टी की चुनौतियाँ
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय पंजाब में गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। राज्यसभा के सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी की चिंता बढ़ गई है, खासकर पंजाब संगठन को लेकर। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि यह स्थिति विधायकों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए डैमेज कंट्रोल के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी संदर्भ में, पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने 29 अप्रैल को जालंधर में सभी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में विधायकों के अलावा ब्लॉक ऑब्जर्वर्स और फ्रंटल संगठनों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इस बैठक में शामिल होंगे। इस दौरान विधायकों की नाराजगी को समझने और पार्टी में संभावित टूट को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब में कई विधायक लंबे समय से मंत्री पद न मिलने और संगठन में उपेक्षा के कारण असंतुष्ट हैं। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी बड़े नुकसान से पहले स्थिति को संभालना चाहता है। बताया जा रहा है कि मनीष सिसोदिया ने गुजरात नगर निकाय चुनाव के प्रचार से लौटकर अरविंद केजरीवाल के साथ पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चर्चा की। पार्टी ने दिल्ली में स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी संजय सिंह को सौंपी है, जबकि पंजाब की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया को दी गई है। नेतृत्व अब हर स्तर पर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पार्टी में और टूट न हो।
इस घटनाक्रम में राघव चड्ढा और डॉ. संदीप पाठक के नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आए हैं। राघव चड्ढा के भाजपा में जाने के बाद यह दावा किया गया था कि पंजाब के 60 से अधिक विधायक उनके संपर्क में हैं। वहीं, डॉ. संदीप पाठक, जो लंबे समय तक पंजाब में संगठनात्मक रणनीति के मुख्य चेहरा रहे, अब पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने विधानसभा क्षेत्रवार मजबूत नेटवर्क तैयार किया था और लगभग हर विधायक की राजनीतिक स्थिति को करीब से समझते थे। अब सभी की नजर जालंधर में होने वाली बैठक पर है, जहां यह तय हो सकता है कि आम आदमी पार्टी इस संकट से उबर पाएगी या पंजाब की राजनीति में कोई बड़ा राजनीतिक विस्फोट देखने को मिलेगा।