×

आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2025 जीतकर रचा इतिहास

आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2025 का खिताब जीतकर भारतीय शतरंज में एक नया अध्याय लिखा है। फाइनल में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। 20 वर्षीय प्रज्ञानानंदा की यह जीत न केवल उनके लिए, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जानें कैसे उन्होंने इस प्रतियोगिता में अपनी रणनीतियों और कौशल का प्रदर्शन किया।
 

प्रज्ञानानंदा की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली : भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2025 का खिताब जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। फाइनल में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की, जिससे वह नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।


चेन्नई के 20 वर्षीय प्रज्ञानानंदा ने अंतिम दिन की शुरुआत 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान से की थी। निर्णायक मुकाबले में क्लासिकल जीत के साथ उन्होंने तीन महत्वपूर्ण अंक जुटाए और कुल 18 अंकों के साथ खिताब पर कब्जा जमाया। यह उपलब्धि खास है क्योंकि 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैम्पियन डी. गुकेश भी यह खिताब नहीं जीत सके थे।


प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस में दूसरी बार भाग लिया, और उनकी शुरुआत धीमी रही। लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे चरण में उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में दो बार हराना रही। यह जीत उनके आत्मविश्वास और जुझारूपन का प्रमाण है। खास बात यह है कि उन्होंने यह प्रदर्शन उस निराशाजनक कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के बाद किया, जहां वह अपेक्षित सफलता नहीं पा सके थे।


खिताबी दौड़ में अमेरिका के वेस्ली सो अंतिम राउंड से पहले 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर थे। हालांकि, अलीरेजा फिरूजा के खिलाफ उनका क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा, जिसके बाद परिणाम आर्मागेडन टाईब्रेकर से तय हुआ। इस स्थिति ने प्रज्ञानानंदा के लिए अवसर पैदा किया, क्योंकि कीमर के खिलाफ क्लासिकल जीत उन्हें सीधे शीर्ष पर पहुंचा सकती थी।


वेस्ली सो ने आर्मागेडन टाईब्रेकर जीतकर 1.5 अंक अर्जित किए, लेकिन उनका कुल स्कोर 17 अंक ही रहा। दूसरी ओर, प्रज्ञानानंदा 18 अंकों के साथ शीर्ष पर रहे और खिताब जीतने में सफल रहे। अलीरेजा फिरूजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।


वहीं, मौजूदा विश्व चैम्पियन डी. गुकेश का अभियान उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उनकी तीसरी उपस्थिति भी खिताब के बिना समाप्त हुई। अंतिम राउंड में मैग्नस कार्लसन ने सफेद मोहरों से खेलते हुए गुकेश को क्लासिकल मुकाबले में पराजित किया और तीन अंक हासिल किए। हालांकि, यह जीत भी कार्लसन को खिताबी दौड़ में वापस नहीं ला सकी और वह 13 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहे।


प्रज्ञानानंदा की यह ऐतिहासिक सफलता भारतीय शतरंज के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान और मजबूत हुई है।