आरपीएफ एसोसिएशन की दयनीय स्थिति: भूतिया बंगले में तब्दील हुआ दफ्तर
आरपीएफ एसोसिएशन का परिचय
ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कर्मचारियों और अधिकारियों का एक सरकारी मान्यता प्राप्त संगठन है, जिसकी स्थापना 1973 में इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा की गई थी। इस संस्था ने पिछले 53 वर्षों में RPF कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की है। हालांकि, हाल के वर्षों में यह संगठन कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके उच्च अधिकारियों की गतिविधियों के कारण, आरपीएफ एसोसिएशन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, और इसका दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय अब एक भूतिया बंगले में बदल गया है।
दिल्ली में दफ्तर की स्थिति
दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित आरपीएफ एसोसिएशन का केंद्रीय कार्यालय वर्षों से साफ-सफाई के अभाव में है। यहां कुड़े का ढेर लगा हुआ है और चारों ओर पेड़ और झाड़ियां इतनी बड़ी हो गई हैं कि उनकी कटाई नहीं की गई है। यह स्थान किसी जंगल का एहसास कराता है।
'भूतिया बंगला' जैसा माहौल
आरपीएफ एसोसिएशन के दफ्तर में प्रवेश करते ही गेट पर दो सुरक्षाकर्मी नजर आते हैं। अंदर का माहौल ऐसा है जैसे यह कोई भूतिया बंगला हो। यहां तीन कमरे हैं, जिनमें से एक आरपीएफ एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष जवाहर सिंह का है, जबकि दूसरे कमरे में महासचिव कंवर लाल बिश्नोई का नाम है, जो बंद है।
80,000 RPF जवानों का प्रतिनिधित्व
ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन लगभग 80,000 RPF जवानों का प्रतिनिधित्व करती है। यह संगठन हमेशा उनके अधिकारों के लिए खड़ा रहता है और उनकी समस्याओं को सरकार और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाता है। महासचिव कंवर लाल बिश्नोई ने बताया कि एसोसिएशन को 1985 में बैन किया गया था, लेकिन 1998 में इसे फिर से बहाल किया गया।
2017 में बैन का सामना
कंवर लाल बिश्नोई ने बताया कि 2017 में एनडीए सरकार ने एसोसिएशन पर फिर से रोक लगा दी। इस रोक के बाद से संगठन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।
दफ्तर को खाली करने का नोटिस
दिल्ली डिवीजन के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर ने एसोसिएशन के दफ्तर को 2024 में खाली करने का नोटिस दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसका जवाब दिया है। कंवर लाल बिश्नोई ने बताया कि यह दफ्तर अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी और नीतीश कुमार द्वारा दिया गया था।
दफ्तर की बुरी हालत
कंवर लाल बिश्नोई ने कहा कि दफ्तर की स्थिति बेहद खराब है। यहां सफाई नहीं हो रही है और घास, पेड़ और झाड़ियों की छंटाई नहीं की जा रही है। यह स्थिति 2024 से चल रही है और मामला अभी भी कोर्ट में है।
कूड़े का अंबार
दफ्तर परिसर में जगह-जगह कूड़े का ढेर है। कमरों का प्लास्टर उखड़ चुका है, बिजली के तार नंगे हैं और एसी खराब हालत में हैं। दरवाजे भी गलने की स्थिति में हैं।
आरपीएफ एसोसिएशन की लड़ाई
ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उन्हें बहाल नहीं किया जाता, वे भारतीय रेलवे से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।