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आरबीआई का नया सर्वेक्षण: म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी जुटाने की योजना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने म्यूचुअल फंड में विदेशी निवेश की जानकारी जुटाने के लिए एक सर्वेक्षण शुरू करने का निर्णय लिया है। यह सर्वेक्षण 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए जानकारी एकत्र करेगा, जिसका उद्देश्य भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम का सटीक आकलन करना है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण के परिणाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे नीति निर्माताओं और विश्लेषकों को महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त होंगे। यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
 

आरबीआई का उद्देश्य विदेशी वित्तीय जोखिम का आकलन


आरबीआई का उद्देश्य भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम का सटीक आंकलन करना


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाले दिनों में देश में विदेशी निवेश की विस्तृत जानकारी एकत्रित करने की योजना बना रहा है, जिसमें म्यूचुअल फंड में होने वाले निवेश की जानकारी भी शामिल होगी। आरबीआई इस संबंध में एक व्यापक सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है, जो म्यूचुअल फंडों की विदेशी देनदारियों और परिसंपत्तियों से संबंधित होगा।


इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम का सटीक आकलन करना है। यह 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए जानकारी एकत्र करेगा। आरबीआई ने 1 जून, 2026 को एक बयान में बताया कि यह सर्वेक्षण मार्च 2026 के अंत तक म्यूचुअल फंडों की बाहरी वित्तीय देनदारियों और परिसंपत्तियों की जानकारी मांगेगा।


सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी जानकारी

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण के परिणाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे। इन परिणामों का उपयोग भारत के बाहरी क्षेत्र के आंकड़ों के संकलन में किया जाएगा। म्यूचुअल फंडों को 7 जुलाई, 2026 तक सर्वेक्षण अनुसूची पूरी करके जमा करनी होगी। यह वार्षिक सर्वेक्षण भारत की बाहरी वित्तीय परिसंपत्तियों और देनदारियों पर व्यापक जानकारी बनाए रखने के आरबीआई के प्रयासों का हिस्सा है।


इस सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी नीति निर्माताओं और विश्लेषकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह उन्हें भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम की निगरानी में सहायता करेगी और आर्थिक विश्लेषण तथा नीति निर्माण के लिए आवश्यक बाहरी क्षेत्र के महत्वपूर्ण आंकड़े तैयार करने में मदद करेगी। आरबीआई का यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो पारदर्शिता और सटीक डेटा उपलब्धता को बढ़ावा देता है।