आरबीआई की मौद्रिक नीति: कम ब्याज दरों का दौर जारी रहेगा
आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक का परिणाम
आरबीआई गवर्नर का बयान
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। इस स्थिति में, यह अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। लेकिन बैठक के बाद, गवर्नर ने एक सकारात्मक प्रेस वार्ता में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में कम ब्याज दरों का दौर लंबे समय तक जारी रह सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम अस्थायी हैं। यह बयान बाजार के प्रतिभागियों और निवेशकों के लिए भविष्य की नीतियों का एक स्पष्ट खाका प्रस्तुत करता है।
कोर महंगाई के नए अनुमान
महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव
आरबीआई ने अपनी 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसमें कोर महंगाई के अनुमान भी शामिल किए गए हैं। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि यह बदलाव बाजार के प्रतिभागियों की लंबे समय से मांग थी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में अपनी पांच वर्षीय समीक्षा पूरी की है, इसलिए कोर महंगाई के आंकड़े पेश करने का यह सही समय है।
मुद्रास्फीति पर नियंत्रण
आरबीआई का प्राथमिक लक्ष्य
गवर्नर ने मौद्रिक नीति की दिशा और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कोई पूर्व-निर्धारित प्रक्रिया नहीं है। उनका मुख्य लक्ष्य हेडलाइन महंगाई को निर्धारित दायरे में बनाए रखना है। हालांकि, महंगाई के विभिन्न घटकों पर ध्यान देना भी आवश्यक है। मल्होत्रा के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति और आरबीआई की यह हमेशा से एक सुसंगत नीति रही है। 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा विकास को समर्थन देने और महंगाई को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन स्थापित करती है।
अतिरिक्त जानकारी
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