आषाढ़ अमावस्या 2026: पितरों की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
अभिजीत मुहूर्त में पितृ पूजा और ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है
Ashadha Amavasya 2026, नई दिल्ली: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, जो पितरों को समर्पित है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह की अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी।
भौमवती अमावस्या का महत्व
शास्त्रों में मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा गया है। आइए जानते हैं कि इस दिन पितरों की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और पूजा की विधि क्या होगी।
पितरों की पूजा का मुहूर्त
आषाढ़ अमावस्या के दिन अभिजीत मुहूर्त पितरों की पूजा के लिए सबसे उत्तम रहेगा। यह मुहूर्त दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 12:55 बजे तक रहेगा। इस समय पितरों की पूजा और तर्पण करना चाहिए। संध्या काल की पूजा का शुभ मुहर्त शाम 7:21 बजे से शुरू होगा और रात 8:22 बजे तक रहेगा।
स्नान-दान का शुभ मुहर्त
इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहर्त ब्रह्म मुहर्त में है, जो सुबह 4:11 बजे से शुरू होकर 4:52 बजे तक रहेगा।
आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि
- आषाढ़ अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- इसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और चंदन मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- फिर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल, कुश और पुष्प के साथ पितरों का तर्पण करें।
- इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, फल या छाता दान करें।
- शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं।