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इंटरनेट पर वायरल वीडियो: एक डिजिटल जाल का सच

हाल के दिनों में इंटरनेट पर '7 मिनट 11 सेकंड' और '6 मिनट 39 सेकंड' नामक वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये वीडियो एक डिजिटल धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं, जिसे 'डिजिटल हनी ट्रैप' कहा जाता है। इन वीडियो के लिंक पर क्लिक करना खतरनाक हो सकता है, जिससे डेटा चोरी और हैकिंग का खतरा है। जानें इन वीडियो के पीछे की सच्चाई और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह।
 

इंटरनेट पर वायरल वीडियो की सच्चाई


इंटरनेट पर वायरल वीडियो की सच्चाई: हाल के दिनों में, '7 मिनट 11 सेकंड' और '6 मिनट 39 सेकंड' नामक वीडियो की खोज में तेजी आई है। ये क्लिप, जिनका संबंध मरियम उमर और फातिमा जटोई से बताया जा रहा है, सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई हैं, जिससे यूज़र्स में जिज्ञासा बढ़ गई है।


हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन वीडियो के लिंक पर क्लिक करना बेहद खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक नई साइबर धोखाधड़ी तकनीक, जिसे 'डिजिटल हनी ट्रैप' कहा जाता है, का हिस्सा है।


'डिजिटल हनी ट्रैप' क्या है?


विशेषज्ञों ने बताया कि इन वायरल वीडियो का उपयोग यूज़र्स को खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए लुभाने के लिए किया जा रहा है। एक बार क्लिक करने पर, ये लिंक डेटा चोरी, हैकिंग, वित्तीय धोखाधड़ी और मैलवेयर हमलों का कारण बन सकते हैं।


चिंताजनक बात यह है कि कई लिंक कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से फैलाए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य भारतीय यूज़र्स को निशाना बनाना और उनकी व्यक्तिगत जानकारी चुराना है।


विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी जानबूझकर 7:11 और 6:39 जैसे विशेष समय के निशान का उपयोग करते हैं ताकि सामग्री अधिक 'वास्तविक' और आकर्षक लगे, जिससे यूज़र्स के फंसने की संभावना बढ़ जाती है।


पाकिस्तान कनेक्शन ने चिंता बढ़ाई


रिपोर्टों के अनुसार, 7:11 वीडियो एक पाकिस्तानी व्यक्ति उमैर से जुड़ा है, जिसकी कथित प्राइवेट क्लिप जनवरी की शुरुआत में सामने आई थी और तेजी से वायरल हो गई थी। कुछ दिनों बाद, फातिमा जटोई से संबंधित 6:39 वीडियो भी ट्रेंड करने लगा।


हालांकि, इन वीडियो की वास्तविकता को लेकर विरोधाभासी दावे हैं। कुछ यूज़र्स का कहना है कि वीडियो असली हैं, जबकि अन्य का मानना है कि इन्हें AI द्वारा बनाया गया है। फातिमा जटोई ने खुद एक वीडियो जारी कर कहा है कि क्लिप नकली है और उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है।


साइबर विशेषज्ञों की सलाह


साइबर विशेषज्ञों ने यूज़र्स को इन वायरल वीडियो से जुड़े किसी भी लिंक को सर्च न करने या उन पर क्लिक न करने की सख्त सलाह दी है। पहले भी, धोखेबाजों ने ट्रेंडिंग वीडियो के नाम पर नकली लिंक बनाकर व्यक्तिगत डेटा चुराने के लिए इसी तरह की चालें चली हैं।


'उत्सुकता आपको भारी पड़ सकती है। एक गलत क्लिक हैकर्स को आपके फोन, बैंक विवरण और व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच दे सकता है,' साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी। यह पहली बार नहीं है कि ऐसा हुआ है।


यह ध्यान देने योग्य है कि 2025 के अंत में, भारत में कई प्राइवेट वीडियो भी वायरल हुए थे, और उन्हें खोजते समय कई यूज़र्स ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे।