इंडिगो की उड़ान ने सुरक्षा कारणों से लौटाया यात्रियों को
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर
मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रभाव अब आम यात्रियों की उड़ानों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी संदर्भ में, सोमवार, 9 मार्च 2026 को इंडिगो की एक महत्वपूर्ण उड़ान को लगभग सात घंटे की यात्रा के बाद दिल्ली लौटना पड़ा।
उड़ान का विवरण
इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-33 ने सोमवार की सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ान भरी। यह उड़ान 26 फरवरी के बाद दिल्ली से मैनचेस्टर के बीच की पहली सीधी उड़ान थी, जिसे यात्रियों ने बड़ी उत्सुकता से देखा।
सुरक्षा कारणों से मार्ग परिवर्तन
सामान्यतः यह यात्रा लगभग 11 घंटे में पूरी होती है। लेकिन ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण, इस क्षेत्र का हवाई क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील हो गया है। सैन्य गतिविधियों और जवाबी हमलों के कारण इस क्षेत्र में उड़ान भरना जोखिम भरा माना जा रहा है।
इसलिए, पायलट ने पहले से ही एक सुरक्षित मार्ग का चयन किया था। उड़ान ने अरब सागर, अदन की खाड़ी और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए अपना रास्ता बनाया, ताकि ईरान और इजराइल के ऊपर से न गुजरना पड़े। लगभग सात घंटे की उड़ान के बाद, जब विमान इथोपिया और इरिट्रिया की सीमा के निकट पहुंचा, तभी अचानक नई हवाई पाबंदियों की जानकारी मिली।
इसका अर्थ यह है कि हालात इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि जो मार्ग कुछ घंटे पहले सुरक्षित था, वह अब उड़ान के लिए उपयुक्त नहीं रह गया। सेना ने अपने ऑपरेशन के कारण कुछ और एयर रूट बंद कर दिए या उन पर पाबंदी लगा दी।
इस स्थिति में, किसी भी यात्री विमान के लिए उन क्षेत्रों से गुजरना जान का जोखिम उठाने जैसा था। इसलिए, इंडिगो ने तुरंत निर्णय लिया कि विमान को वापस दिल्ली लौटाया जाए। यह निर्णय यात्रियों और क्रू सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
एयरलाइन का बयान
इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा, "मध्य पूर्व की बदलती स्थिति के कारण हमारी कुछ उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है या उन्हें डायवर्ट करना पड़ रहा है। दिल्ली-मैनचेस्टर उड़ान को अंतिम समय में हवाई क्षेत्र की पाबंदी के कारण वापस लौटना पड़ा। हम अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं कि यात्रा कब फिर से शुरू की जा सकती है।"
यह घटना दर्शाती है कि युद्ध का प्रभाव केवल जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में उड़ान भर रहे यात्रियों पर भी पड़ रहा है। फिलहाल, यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए कहा गया है और उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।