×

इजराइल का ईरान की गैस फील्ड पर नया मिसाइल हमला

इजराइल ने ईरान की साउथ पार्स गैस फील्ड पर एक बार फिर से मिसाइल हमला किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड मानी जाती है। इस हमले के बाद ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अन्य समुद्री मार्गों को भी निशाना बना सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का अल्टीमेटम दिया है। इस बीच, भारत के लिए राहत की खबर है कि दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। जानें इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
 

इजराइल का मिसाइल हमला

सोमवार को इजराइल ने ईरान की साउथ पार्स गैस फील्ड पर एक बार फिर से मिसाइल हमला किया। यह गैस फील्ड दुनिया की सबसे बड़ी है, जो ईरान और कतर के बीच स्थित है। इससे पहले, 18 मार्च को भी इस गैस फील्ड पर हमला किया गया था। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें इस हमले की कोई पूर्व सूचना नहीं थी और ऐसे हमलों को रोकने की आवश्यकता है। इसी बीच, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास भी धमाकों की आवाज सुनाई दी, जो अमेरिकी ठिकानों को लक्षित कर किया गया था।


ईरान की चेतावनी

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज के अलावा अन्य समुद्री मार्गों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि किसी भी बड़े हमले का जवाब केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर भी प्रभाव डालकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ-साथ बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी खतरे में पड़ सकते हैं।


ट्रम्प का अल्टीमेटम

यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का अल्टीमेटम दिया है और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे पहले, ईरान के करीबी माने जाने वाले यमन के हूती विद्रोही रेड सी में जहाजों पर हमले की बात कर चुके हैं।


भारत के लिए राहत की खबर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बावजूद, भारत के लिए एक सकारात्मक खबर आई है। सरकार ने बताया कि एलपीजी लेकर आ रहे भारत के दो जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और जल्द ही भारत पहुंचेंगे। इन जहाजों के नाम ग्रीन साध्वी और ग्रीन आशा हैं, जिनमें कुल 60 हजार टन से अधिक गैस है। ग्रीन साध्वी 7 अप्रैल और ग्रीन आशा 9 अप्रैल तक भारत पहुंच सकती है।


भारतीय जहाजों की सुरक्षा

अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस समय उस क्षेत्र में भारत के 16 जहाज मौजूद हैं, जिनमें 400 से अधिक भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि अब तक किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई दुर्घटना नहीं हुई है।