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इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत का फैसला, रिकॉर्ड मतदान

इजराइल में हाल ही में हुए चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत का फैसला हो गया है। मतदान के दौरान रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिससे यह चुनाव ऐतिहासिक बन गया। नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से अधिक से अधिक वोट डालने की अपील की, खासकर मुस्लिम महिलाओं के बीच। इस बार उन्हें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जानें इस चुनाव के परिणाम और नेतन्याहू के भविष्य के बारे में अधिक जानकारी।
 

इजराइल में चुनावी मतदान का उत्साह


नई दिल्ली। इजराइल के नागरिकों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भविष्य का निर्णय कर दिया है। भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे इजराइल में मतदान समाप्त हुआ। बुधवार की सुबह तक चुनाव परिणामों का रूझान सामने आ जाएगा। इस बार इजराइल में मतदान का रिकॉर्ड टूट गया है। इजराइल के समय के अनुसार शाम चार बजे तक, यानी भारतीय समय के अनुसार रात 10 बजे तक, पहले छह घंटों में 55 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला। इस प्रकार, इजराइल के लोगों ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इसके बाद तीन घंटे की और वोटिंग में भी उच्चतम मतदान का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है।


इजराइल में सबसे अधिक मतदान का रिकॉर्ड 79.9 प्रतिशत है, जो 1988 में दर्ज किया गया था। पहले छह घंटों की वोटिंग के बाद, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार यह रिकॉर्ड टूट सकता है। मतदान के दौरान, मंगलवार को प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर साझा कर अपने समर्थकों से अधिक से अधिक वोट डालने की अपील की।


नेतन्याहू ने एक समाचार चैनल की वीडियो फुटेज साझा की, जिसमें दो मतदान केंद्रों की तुलना की गई है। उन्होंने लिखा, 'अरब क्षेत्रों में सामान्य से अधिक मतदान हो रहा है, जबकि दक्षिणपंथी मतदाता कम संख्या में वोट डालने आ रहे हैं। यह एक आपात स्थिति है, हमारे यहूदी देश का भविष्य दांव पर है। तुरंत बाहर निकलें और वोट डालें। हमें अब जागरूक होना होगा, घर पर नहीं बैठना है।'


यह ध्यान देने योग्य है कि इस बार नेतन्याहू को पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट के गठबंधन को अधिक सीटें दी गई हैं। वहीं, नेतन्याहू के गठबंधन को केवल एक सर्वेक्षण में बढ़त दी गई है और एक अन्य सर्वेक्षण में उनकी सरकार बनने की संभावना जताई गई है। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की आवश्यकता होती है। इजराइल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के कारण, 76 वर्षों के इतिहास में किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अकेले बहुमत हासिल नहीं किया है।