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इजरायल-ईरान संघर्ष: भारत ने बढ़ते तनाव पर जताई चिंता

इजरायल और ईरान के बीच हालिया हमलों ने पश्चिम एशिया में तनाव को बढ़ा दिया है। भारत ने इन हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में शांति की अपील की है। केंद्र सरकार ने संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई है। ईरान में भारतीय नागरिकों को यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। जानें इस जटिल स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
 

इजरायल और ईरान के बीच ताजा हमले

सोमवार की सुबह, इजरायल और ईरान ने एक-दूसरे पर जवाबी हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा फिर से बढ़ गया है। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर लागू होने के बाद से दोनों देशों के बीच शांति बनी हुई थी, लेकिन अब फिर से संघर्ष शुरू हो गया है।


भारत का बयान

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में क्षेत्र में तनाव को तुरंत कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्रालय ने कहा, 'भारत पश्चिम एशिया में हुए हालिया हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंताजनक है।'


मानवीय और आर्थिक प्रभाव

केंद्र सरकार ने इस लंबे संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। बयान में कहा गया, 'यह संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक समय तक चल चुका है, जिससे कई जानें गई हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।'


सुरक्षा की अपील

विदेश मंत्रालय ने युद्ध में शामिल देशों से आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और शांति के लिए प्रयास करने की अपील की। मंत्रालय ने कहा, 'हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तुरंत तनाव कम करें और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।'


भारत की यात्रा सलाह

ईरान में भारतीय दूतावास ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे नए हमलों के बीच ईरान की यात्रा से बचें और यदि संभव हो तो देश छोड़ दें।


तनाव के कारण

रविवार को ईरान ने इजरायल पर हमला किया, जिसके बाद इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों पर बिना चेतावनी के हमला किया। इजरायल का कहना है कि ईरान के हिज़्बुल्लाह लड़ाकों ने पहले इजरायल पर गोलीबारी की थी। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी यरुशलम पर हमले की चेतावनी दी, जिससे तनाव और बढ़ गया।