इजरायल में मतदान का नया रिकॉर्ड, नेतन्याहू का भविष्य दांव पर
इजरायल में ऐतिहासिक मतदान
इजरायल में मंगलवार को चार दशकों में सबसे अधिक मतदान हुआ। संसदीय चुनाव में लाखों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जिससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य संकट में है।
केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे तक 44.9 प्रतिशत योग्य मतदाता मतदान कर चुके थे। यह आंकड़ा 1973 के बाद से सबसे अधिक है। लगभग 73 लाख योग्य मतदाताओं में से 32,90,480 ने मतदान किया।
मतदान की संख्या में वृद्धि से छोटी पार्टियों के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में सीटें हासिल करना कठिन हो सकता है। इजरायल में किसी पार्टी को सीटें पाने के लिए 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना आवश्यक है। कुल मतदान बढ़ने के साथ, इस सीमा को पार करने के लिए आवश्यक वोटों की संख्या भी बढ़ जाती है।
इजरायली सेना के अनुसार, दोपहर एक बजे तक सैन्यकर्मियों में मतदान 48 प्रतिशत रहा, जबकि 2022 के चुनाव में इसी समय यह 44.4 प्रतिशत था।
श्री नेतन्याहू और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के बीच हाल के जनमत सर्वेक्षणों में मुकाबला लगभग बराबरी का दिखा। किसी भी नेता के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटें मिलने की संभावना नहीं है, जिससे सरकार गठन के लिए लंबी बातचीत की संभावना बढ़ गई है।
चुनाव में सुरक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं और श्री नेतन्याहू के नेतृत्व से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। मंगलवार सुबह कई दलों ने मतदान केंद्रों पर कथित अनियमितताओं की शिकायत की, लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति ने कहा कि मतपत्रों में व्यवस्थित छेड़छाड़ का कोई प्रमाण नहीं मिला।
नवगठित याशर पार्टी के नेता आइजेनकोट तथाकथित परिवर्तनवादी गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं वाले दल शामिल हैं जो नेतन्याहू को सत्ता में बने रहने से रोकना चाहते हैं।
श्री नेतन्याहू, जो पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने थे, वर्तमान में दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ गठबंधन के जरिए एक और कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्षी अभियान में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों से पहले की सुरक्षा विफलताएं प्रमुख मुद्दा रही हैं। इन हमलों में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे।
विपक्षी नेताओं ने स्वतंत्र जांच आयोग की मांग की है, जिसका श्री नेतन्याहू विरोध करते रहे हैं। उनका तर्क है कि ऐसी जांच उनके खिलाफ पक्षपातपूर्ण होगी।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में खबरें आईं कि श्री नेतन्याहू ने मतदान से पहले ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई के लिए मंजूरी मांगी थी। इजरायल के चैनल 12 ने बताया कि सेना प्रमुख एयाल जमीर ने इस कदम का विरोध किया था।