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इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकीलों का हंगामा, जज पर गंभीर आरोप

इलाहाबाद हाई कोर्ट में बुधवार को वकीलों का प्रदर्शन उग्र हो गया, जिसमें फर्नीचर फेंके जाने की घटनाएं भी शामिल थीं। जस्टिस अजय भनोट पर आरोप है कि उन्होंने एक वकील के साथ दुर्व्यवहार किया। बार एसोसिएशन ने जज के खिलाफ अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। जस्टिस अरुण कुमार सिंह ने इस हंगामे को अदालत की अवमानना करार दिया है और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से शामिल व्यक्तियों की पहचान करने का निर्देश दिया है। वकीलों ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें जज के व्यवहार की निंदा की गई है।
 

इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन

बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों का प्रदर्शन उग्र हो गया। इस दौरान अदालत में फर्नीचर फेंके जाने की घटनाएं भी हुईं। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक दिन पहले ही जस्टिस भनोट के खिलाफ अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी, आरोप लगाते हुए कि जज ने एक वकील के साथ दुर्व्यवहार किया।


वकीलों का हंगामा और जज का जवाब

हाई कोर्ट से प्राप्त वीडियो में कई वकील जस्टिस भनोट की अदालत के बाहर नारेबाजी करते हुए नजर आ रहे हैं। उस समय जस्टिस भनोट जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत के साथ बैठे थे। वकीलों ने नारेबाजी के साथ-साथ अदालत में फर्नीचर और अन्य सामान फेंकने का आरोप लगाया।


अवमानना की कार्यवाही की तैयारी

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने इस हंगामे को अदालत की अवमानना करार दिया है। उन्होंने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया है कि सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर शामिल व्यक्तियों की पहचान की जाए, ताकि अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सके।


बार एसोसिएशन का जज पर आरोप

बार एसोसिएशन ने 27 अक्टूबर को रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया है कि विवाद तब शुरू हुआ जब एक वकील ने पुलिस अधीक्षक (SP) के उस स्थान पर बैठने पर आपत्ति की, जो आमतौर पर वकीलों के लिए आरक्षित होता है। एसोसिएशन का आरोप है कि जस्टिस भनोट की अदालत में पुलिस अधिकारियों के लिए अलग कुर्सी लगाई जा रही थी।


वकील से माफी मांगने का आदेश

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक सरकारी वकील ने उस वकील को टोका और जज से शिकायत की। इसके बाद जज ने वकील को उंगली दिखाते हुए जेल भेजने का आदेश दिया। जब वकील ने माफी मांगी, तो जज ने उसे पुलिस अधिकारी से माफी मांगने के लिए मजबूर किया।


वकीलों की प्रतिक्रिया

इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी को उस स्थान पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाती, तो वकील नाराज नहीं होते। उन्होंने कहा कि जज को वकीलों के साथ अभद्रता नहीं करनी चाहिए और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। संदीप ने अदालत में फर्नीचर फेंकने की निंदा की और कहा कि बार और बेंच को सहयोगी के रूप में काम करना चाहिए।