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इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: निकाह हलाला और तीन तलाक पर गंभीर टिप्पणियाँ

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह हलाला और तीन तलाक पर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं, जिसमें महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने व्यक्तिगत कानूनों के नाम पर अपराधों को छिपाने की अनुमति नहीं दी और मामले की गहन जांच का आदेश दिया। जानें इस महत्वपूर्ण फैसले के पीछे की कहानी और इसके सामाजिक प्रभाव।
 

महिलाओं के यौन शोषण पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसे प्रथाओं के संदर्भ में कहा है कि महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने इसे समाज का एक काला अध्याय बताया, जो संवैधानिक मूल्यों और मानव गरिमा के खिलाफ है। ये कृत्य न केवल कानून के तहत अपराध हैं, बल्कि समाज की आत्मा को भी आहत करते हैं।


कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति और अन्य रिश्तेदारों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों के नाम पर अपराधों को छिपाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह मामला सामूहिक दुष्कर्म का प्रतीत होता है, जिसके लिए गहन जांच आवश्यक है।


अमरोहा का मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का है, जहां पीड़िता का निकाह 2015 में जबरन किया गया था। उसके पति ने 2016 में उसे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद, मौलाना की सलाह पर उसे हलाला प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर किया गया। मौलाना ने उसके साथ बलात्कारी संबंध बनाए, जिसके बाद उसका पुनः निकाह हुआ।


गैंगरेप का मामला

पीड़िता के साथ हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। कोर्ट ने कहा कि पहली हलाला प्रक्रिया के दौरान पीड़िता नाबालिग थी, जो वैधानिक बलात्कार का मामला बनता है। आरोपियों ने दलील दी कि यह मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित है, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।


कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि जब आपराधिक कानून की बात आती है, तो व्यक्तिगत कानूनों का हवाला देकर अपराधों को छिपाने की कोई जगह नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध को पर्सनल लॉ के तहत संरक्षित नहीं किया जा सकता।


पुलिस जांच का रास्ता साफ

हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे पुलिस को मामले की गहन जांच करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।