इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गाजियाबाद में गुलमोहर ग्रीन्स के दो टावरों का ध्वस्तीकरण
गुलमोहर ग्रीन्स मामले में हाईकोर्ट की सख्ती
गाजियाबाद स्थित गुलमोहर ग्रीन्स आवासीय सोसाइटी में अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोसाइटी के दो टावरों को पूरी तरह से ध्वस्त करने और चार अन्य टावरों की नौवीं और दसवीं मंजिल को गिराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने प्रमोटर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाने के साथ-साथ धोखाधड़ी और उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम के उल्लंघन के संबंध में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को हटाने के लिए एक स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। अदालत के आदेश के अनुसार, टावर संख्या 27 और 28 को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा, जिनमें प्रत्येक में पांच मंजिलें और आठ आवासीय इकाइयां हैं। इसके अलावा, टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की अवैध रूप से निर्मित नौवीं और दसवीं मंजिल को दो महीने के भीतर गिराना होगा। ध्वस्तीकरण का खर्च प्रमोटर से भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूला जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान GDA को पुलिस और जिला प्रशासन से आवश्यक सहायता प्राप्त होगी।
प्रमोटर पर हर्जाना
अदालत ने प्रमोटर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है, जिसे फैसले की तारीख से एक महीने के भीतर गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के खाते में जमा करना होगा। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण और प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के कारण निवासियों को मुकदमेबाजी करनी पड़ी और उन्हें काफी खर्च उठाना पड़ा। इस नुकसान को ध्यान में रखते हुए, GDA को 11 याचिकाकर्ताओं में से प्रत्येक को 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया है।
प्रमोटर के खिलाफ FIR
हाईकोर्ट ने संबंधित थाने को आदेश दिया है कि वह फैसले की तारीख से दो सप्ताह के भीतर प्रमोटर के खिलाफ FIR दर्ज करे। मामले की जांच किसी भी अधिकारी को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद से नीचे नहीं सौंपी जाएगी। अदालत ने कहा कि प्रमोटर ने तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और सोसाइटी के साझा क्षेत्रों को बेचकर फ्लैट मालिकों के हितों को नुकसान पहुंचाया। इसे धोखाधड़ी और कानून के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला माना गया है।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
अदालत ने यह भी माना कि GDA के अधिकारियों ने निर्माण को नियमित करने के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन नहीं किया। विशेष रूप से, प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष द्वारा नियमों के उल्लंघन के बावजूद निर्माण को मंजूरी देने पर सवाल उठाए गए हैं। हाईकोर्ट ने संबंधित पूर्व उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, वर्ष 2018 में दर्ज FIR की जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।