इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा: कैश कांड में विवाद
जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर न्यायिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा है, जबकि उन पर गंभीर आरोपों के चलते महाभियोग की प्रक्रिया चल रही थी। इस बीच, उनके खिलाफ एक आंतरिक जांच भी चल रही है।
कैश कांड का खुलासा
जस्टिस वर्मा का नाम तब विवादों में आया जब उनके दिल्ली स्थित आवास से जले हुए नोटों की बड़ी मात्रा बरामद हुई। इस घटना के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने पिछले साल 5 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी, लेकिन यह कैश कांड उनके लिए समस्या बन गया।
महाभियोग की प्रक्रिया
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। यह समिति आगामी मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है। पिछले साल 12 अगस्त को जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग वाला एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार किया गया था, जिसके बाद इस समिति को जांच का जिम्मा सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट से झटका
इस्तीफा देने से पहले, जस्टिस वर्मा ने कानूनी लड़ाई के जरिए खुद को बचाने की कोशिश की थी। इस साल जनवरी में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा जांच समिति गठित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। लेकिन, उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे उनकी स्थिति और भी कठिन हो गई।
संसद में हंगामा
इस मामले ने संसद में भी हंगामा मचाया। 21 जुलाई 2025 को संसद के दोनों सदनों में जस्टिस वर्मा के महाभियोग की मांग करने वाले प्रस्ताव पेश किए गए। उस दिन राज्यसभा के सभापति ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष ने जांच समिति के गठन की घोषणा की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।