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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द की, एसएसपी को सख्त सजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया है, जिसने शादी का झांसा देकर जमानत प्राप्त की थी। अदालत ने आरोपी को हिरासत में भेजने का आदेश दिया और मेरठ के एसएसपी को कोर्ट में उपस्थित रहने की सजा सुनाई। इसके अलावा, सीजेएम मेरठ के खिलाफ अनुशासनहीनता की जांच की सिफारिश की गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के सख्त रुख के पीछे की वजह।
 

जमानत रद्द करने का आदेश

प्रयागराज: शादी का झांसा देकर जमानत प्राप्त करने वाले एक आरोपी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने आरोपी की जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द करते हुए उसे हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके साथ ही, अदालती आदेशों की अनदेखी करने के लिए मेरठ के एसएसपी को शाम चार बजे तक कोर्ट में उपस्थित रहने की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में प्रशासनिक जांच की सिफारिश की गई है।


शादी की शर्त पर मिली थी जमानत

शादी की शर्त पर मिली थी रिहाई, बाहर आते ही पलट गया आरोपी
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने जमानत निरस्तीकरण याचिका पर यह सख्त फैसला सुनाया। आरोपी को हाईकोर्ट ने 18 मार्च को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह पीड़िता से विवाह करेगा। जेल से रिहा होने के बाद आरोपी ने अपने वादे से मुकरने का निर्णय लिया। इसके बाद पीड़िता ने जमानत रद्द करने की याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान आरोपी ने पीड़िता से शादी करने से साफ इनकार कर दिया, जिसे अदालत ने धोखा मानते हुए जमानत रद्द कर दी।


एसएसपी की लापरवाही पर हाईकोर्ट का गुस्सा

हाईकोर्ट में पेश करने के बजाय स्थानीय कोर्ट भेजा, SSP को 4 बजे तक कोर्ट में खड़ा रखा
हाईकोर्ट ने 28 सितंबर को आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था और एसएसपी मेरठ को उसे सीधे हाईकोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन मेरठ पुलिस ने आरोपी को हाईकोर्ट लाने के बजाय स्थानीय सीजेएम अदालत में पेश किया। इस पर हाईकोर्ट ने एसएसपी को तलब किया और उन्हें शाम 4 बजे तक कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया।


सीजेएम मेरठ के खिलाफ कार्रवाई

सीजेएम मेरठ के आचरण पर भड़की अदालत, प्रशासनिक जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने सीजेएम मेरठ की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब सीजेएम को जानकारी थी कि आरोपी को सीधे पेश करने का वारंट जारी किया गया है, तो उसे जेल भेजने का निर्णय क्यों लिया गया। अदालत ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए प्रशासनिक स्तर पर उचित कार्रवाई की सिफारिश की।