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इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए केंद्र की सब्सिडी समाप्त, यूपी में राहत जारी

केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक खरीदने पर दी जाने वाली 5,000 रुपये की सब्सिडी 31 जुलाई के बाद समाप्त हो जाएगी। हालांकि, उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार की सब्सिडी योजना और अन्य छूटें जारी रहेंगी। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे यह बदलाव खरीदारों को प्रभावित करेगा और यूपी में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कैसे हो रहा है।
 

केंद्र सरकार की सब्सिडी का अंत


भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही महत्वपूर्ण सब्सिडी अब समाप्त होने वाली है। 31 जुलाई के बाद, इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक खरीदने वालों को 5,000 रुपये की सहायता नहीं मिलेगी, जिससे नई ईवी की खरीद की लागत में वृद्धि होगी। हालांकि, उत्तर प्रदेश के खरीदारों के लिए एक सकारात्मक पहलू यह है कि राज्य सरकार की सब्सिडी योजना और रोड टैक्स तथा रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट जारी रहेगी, जिससे कुल बचत का एक बड़ा हिस्सा बना रहेगा।


बचत का गणित 31 जुलाई के बाद

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खरीद पर केंद्र और राज्य दोनों से 5,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस, स्मार्ट कार्ड आरसी शुल्क और एचएसआरपी नंबर प्लेट शुल्क में भी छूट मिलती है। इस प्रकार, कुल बचत लगभग 18,000 रुपये तक पहुंच जाती है। लेकिन 31 जुलाई के बाद केंद्र सरकार की 5,000 रुपये की सहायता समाप्त होने से यह लाभ घटकर लगभग 13,000 रुपये रह जाएगा। केंद्रीय सब्सिडी का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगा जिनका पंजीकरण और ई-वाउचर निर्धारित समय सीमा के भीतर जारी किया गया हो।


यूपी सरकार की सब्सिडी के लिए नियम

राज्य सरकार की ईवी सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए वाहन का उत्तर प्रदेश में पंजीकरण अनिवार्य है। वाहन को 14 अक्टूबर 2022 के बाद खरीदा जाना चाहिए। यदि कोई वाहन बिना बैटरी के खरीदा गया है, तो केवल आधी सब्सिडी मिलेगी। एक व्यक्ति अपनी पहचान पर केवल एक इलेक्ट्रिक वाहन के लिए ही प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकता है। वाहन खरीदने के बाद ऑनलाइन आवेदन करना होता है, जिसके बाद डीलर, परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों की जांच पूरी होने पर राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।


चार्जिंग नेटवर्क में यूपी की अग्रणी स्थिति

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश में चार्जिंग ढांचे का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राज्य में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या देश में सबसे अधिक है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों के साथ-साथ एक्सप्रेसवे पर भी फास्ट चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दिल्ली-मेरठ, यमुना और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के महत्वपूर्ण स्थानों पर हाई-स्पीड चार्जर स्थापित किए गए हैं, जिससे लंबी दूरी की यात्रा करना आसान हो गया है।


बढ़ती मांग के साथ नई योजनाएं

उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 15 लाख से अधिक हो चुकी है, जबकि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या अभी भी आवश्यकता से काफी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य को 38,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता है। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना और राज्य सरकार की पहल के तहत नए चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जा रहे हैं। बड़े शहरों की पार्किंग, मॉल और व्यावसायिक परिसरों में चार्जिंग ग्रिड विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे पर विशेष सहायता भी दी जा रही है।