इस्लामाबाद में 29,000 से अधिक पेड़ काटने पर हंगामा
इस्लामाबाद में पेड़ काटने का विवाद
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी में 29,115 पेड़ काटे जाने की घटना ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजधानी को 'फेफड़ों से वंचित' कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे।
प्रसिद्ध मीडिया आउटलेट डॉन के अनुसार, गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में यह जानकारी दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन पेड़ों के स्थान पर आने वाले महीनों में नए पेड़ लगाए जाएंगे।
इससे पहले, पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के अली मुहम्मद खान और पीपीपी की शाजिया मरी ने इस मुद्दे को उठाया। अली ने कहा कि यदि गृह मंत्रालय और इस्लामाबाद प्रशासन ने नागरिकों को विश्वास में लेकर पेड़ काटे होते, तो स्थिति अलग होती।
उन्होंने कहा, 'आपने जो पेड़ काटे हैं, वे इस्लामाबाद के फेफड़े थे।' अली ने सवाल उठाया कि यदि केवल पेपर मलबेरी के पेड़ हटाए जा रहे थे, तो 50 से 60 साल पुराने पेड़ क्यों काटे गए?
मरी ने भी इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर पेड़ काटने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'विभिन्न क्षेत्रों से रिपोर्टें आ रही हैं कि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं।' उन्होंने इस कार्रवाई की जवाबदेही की मांग की।
पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा इस्लामाबाद में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम नागरिकों ने भी इसका विरोध किया। इसके बाद, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने कहा कि लगभग 29,000 पेपर मलबेरी पेड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत काटे गए थे।
मंत्री ने बताया कि ये पेड़ एलर्जी और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे थे, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। उन्होंने कहा कि काटे गए हर पेड़ के बदले तीन नए पौधे लगाए जाएंगे।
इस योजना के तहत, पर्यावरण सुधार के लिए परिपक्व देशी पेड़ भी लगाए जाएंगे। इस कार्रवाई पर जनता और सिविल सोसाइटी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है, और सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।