ई-20 जनता पार्टी का नया सोशल मीडिया अभियान: सवाल पूछने का अधिकार
नई दिल्ली में आंदोलन की लहर
नई दिल्ली। हाल ही में एक आंदोलन की गूंज खत्म नहीं हुई थी कि एक नया आंदोलन शुरू हो गया है। सरकार के सामने लगातार सवाल उठते जा रहे हैं। नीट परीक्षा पेपर लीक और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन हुआ। इसके बाद जंतर-मंतर पर सीजेपी समर्थकों ने एक महीने से अधिक समय तक प्रदर्शन किया। छात्रों और विपक्ष के दबाव में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपना इस्तीफा दिया। इसके बाद, केंद्र सरकार ने सीजेपी की अन्य मांगों को मानने के बाद इस प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा की। अब, एक नया सोशल मीडिया अभियान चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर बढ़ता समर्थन
कैंपेन से सोशल मीडिया पर हजारों लोग जुड़े
ई-20 जनता पार्टी (E20 Janata Party) के नाम से चल रहे इस अभियान के ट्विटर पर 32.3 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर यह संख्या 1137 तक पहुंच गई है। ट्विटर पर पार्टी के एक पोस्ट में लिखा गया है- क्या हम केवल ईंधन के उपभोक्ता हैं, या हम जागरूक नागरिक हैं जिन्हें सवाल पूछने का अधिकार है? इथेनॉल ब्लेंडिंग पर देशभर में चर्चा हो रही है, जिसमें विभिन्न दावे और दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। ऐसे में, हर नागरिक और वाहन मालिक को स्पष्ट, पारदर्शी और प्रमाणों पर आधारित जानकारी मिलनी चाहिए।
सवाल पूछने का अधिकार
पोस्ट में आगे कहा गया है- किसी सरकारी नीति पर सवाल उठाना उसका विरोध नहीं है। लोकतंत्र में सवाल पूछना एक मूलभूत अधिकार है और यह जागरूक समाज की पहचान है। यदि कोई नीति वास्तव में जनहित में है, तो उसे जनता की जांच पर खरा उतरना चाहिए, और हर उचित सवाल का जवाब तथ्यों, पारदर्शिता और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दिया जाना चाहिए। आइए, हम अपनी राय जानकारी और सबूतों के आधार पर बनाएं - न कि अनुमान या भावनाओं के आधार पर। जानकारी रखें। सवाल पूछें। जवाब मांगें। यही हर जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।
नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मांगा इस्तीफा
इसके अलावा, कई अन्य पोस्ट में केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग की गई है। जनता से इस आंदोलन को देश के हर कोने तक पहुंचाने की अपील की गई है। एक अन्य पोस्ट में कहा गया है कि यह किसी पार्टी की नहीं, बल्कि जनहित की बात है। आइए, मिलकर आवाज उठाएं और एथनॉल नीति पर सरकार से सवाल करें।