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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का पाकिस्तान दौरा कूटनीतिक हलचल का कारण बना है। इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी शर्तें पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाएगा। पहले दौर की वार्ता में असफलता के बाद, दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के बारे में और क्या उम्मीदें हैं।
 

ईरान के विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का पाकिस्तान दौरा कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उनकी कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। ईरान अपने संदेश को पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाएगा। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर को भी पाकिस्तान भेजा है।


अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल आज पाकिस्तान पहुंचने वाला है। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बार यात्रा पर नहीं जा रहे हैं और उन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है। दूसरी ओर, संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे।


ईरान की शर्तें

व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधे शांति वार्ता करेगा। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि ऐसी कोई बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि ईरान अपनी बात सीधे अमेरिका से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अधिकारियों के माध्यम से पहुंचाएगा।


पहले दौर की वार्ता

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को पहले दौर की बातचीत हुई थी, जो 21 घंटे तक चली, लेकिन सफल नहीं हो पाई। दोनों पक्षों के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई।


अमेरिका की अपेक्षाएँ

अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से सुरक्षित और खुली रहे, ताकि तेल की आपूर्ति में कोई रुकावट न आए। वहीं, ईरान इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है और इसे बातचीत में दबाव बनाने के लिए उपयोग करता है। अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह इसे बंद नहीं करेगा।