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ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर: कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब भारतीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। इस युद्ध के कारण पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे कंडोम की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कस्टम ड्यूटी को शून्य कर दिया है, लेकिन उद्योग में लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की कमी से समस्याएँ बढ़ रही हैं। जानें इस संकट का आम आदमी की जीवनशैली पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
 

भारत में बढ़ती महंगाई का संकट

नई दिल्ली: इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का प्रभाव अब भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अस्थिर रुख ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। युद्ध के आरंभ के बाद से ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद कर दिया है, जिसके कारण कई देशों में तेल और गैस की भारी कमी हो गई है। भारत भी इस मार्ग के माध्यम से पेट्रोकेमिकल उत्पादों और ड्राई फ्रूट्स का बड़ा आयात करता है। इस आयात में रुकावट का सबसे बड़ा प्रभाव पेट्रोकेमिकल उद्योग पर पड़ा है, जिससे आम लोगों की जीवनशैली पर भी असर पड़ सकता है, और कंडोम की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है।


कंडोम निर्माताओं की चिंता

कंडोम बनाने वाली कंपनियों में बेचैनी


पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी के कारण बाजार में इससे बने सभी उत्पादों की कीमतें बढ़ने की कगार पर हैं। कंडोम उद्योग में इस संकट के चलते बेचैनी का माहौल है। कंडोम बनाने में उपयोग होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट आ गई है। पेट्रोकेमिकल उत्पाद, सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया की आपूर्ति में बाधा आने से थोक और खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ने की संभावना है। इस उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है, जिससे सिलिकॉन ऑयल की कीमतें भी बढ़ेंगी।


सप्लाई चेन की चुनौतियाँ

लॉजिस्टिक्स की समस्याएँ


कंडोम को मुलायम बनाने के लिए सिलिकॉन ऑयल की कोटिंग की जाती है, जो एक लुब्रिकेंट के रूप में कार्य करता है। कच्चे माल की इस कमी का असर सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, पीवीसी फाइल, एल्युमिनियम फाइल और पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति में रुकावट से उनकी कीमतों में भी वृद्धि होने की संभावना है। लॉजिस्टिक्स की समस्या भी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि समुद्री मार्ग से माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। पहले जो माल एक हफ्ते में पहुंचता था, अब उसे तीन हफ्ते तक का समय लग रहा है।


महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार का कदम

सरकार की राहत योजना


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए और आम जनता तथा उद्योगों को महंगाई से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण राहत योजना की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमें 41 आवश्यक पेट्रोकेमिकल वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। यह निर्णय 2 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक लागू रहेगा। इस कदम के माध्यम से सरकार प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, केमिकल और ऑटोमोटिव पार्ट्स जैसे विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत प्रदान करना चाहती है, ताकि आम जनता पर इसका प्रभाव कम से कम हो।