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ईरान-अमेरिका संघर्ष से बढ़ी चिंता: भारत के पास 25 दिनों का तेल भंडार

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक चिंता को जन्म दिया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। भारत के पास 25 दिनों का तेल भंडार है, और सरकार ने नागरिकों को आश्वासन दिया है कि ऊर्जा की आपूर्ति सुरक्षित है। जानें भारत की तैयारी और स्थिति पर सरकार की नजर।
 

मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक तेल कीमतें


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बना दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले की संभावना जताई गई है।


इस स्थिति के कारण तेल टैंकरों का आवागमन बाधित हो गया है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 79-82 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई हैं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी बढ़ रहा है।


भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार

भारत के पास 25 दिनों का पर्याप्त भंडार


सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन (जैसे पेट्रोल और डीजल) का भंडार लगभग 25 दिनों की आवश्यकता के लिए उपलब्ध है। इसमें रिफाइनरी में रखा तेल, रणनीतिक भंडार और रास्ते में आने वाले जहाजों का स्टॉक शामिल है।


पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले कहा था कि देश अल्पकालिक बाधाओं का सामना करने के लिए तैयार है। सरकार ने नागरिकों को आश्वासन दिया है कि ऊर्जा की आपूर्ति सुरक्षित है और कोई तत्काल कमी नहीं होगी।


वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज

वैकल्पिक स्रोतों की तलाश


सरकार अब कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के आयात के लिए नए देशों और मार्गों की खोज कर रही है। भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविधता दे रहा है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम हो सके।


कई अन्य स्रोतों से तेल की आपूर्ति हो रही है। मंत्रालय ने 24 घंटे नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जहां ईंधन की आपूर्ति और भंडार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थिति को "संतोषजनक" बताया गया है।


पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

पेट्रोल-डीजल कीमतों में कोई बदलाव नहीं


सूत्रों ने बताया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई योजना नहीं है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।


यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन अभी चिंता की कोई बात नहीं है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, लेकिन पिछले वर्षों में आपूर्ति स्रोतों को बढ़ाने से जोखिम कम हुआ है।


भारत सरकार की सतर्कता

भारत सरकार सतर्क


होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का आवागमन करता है, इसलिए लंबे संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। भारत सरकार सतर्क है और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।


उम्मीद है कि जल्द ही क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है।