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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: ट्रंप ने हमलों को टालने का दिया आदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद हमलों को टालने का आदेश दिया है। ईरान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनके युद्ध संबंधी लक्ष्य पूरे नहीं होते, तब तक वे बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे। जानें इस तनावपूर्ण स्थिति के बारे में और क्या कहा गया है।
 

ट्रंप का बयान और ईरान की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 'सकारात्मक और सार्थक बातचीत' हुई है। उन्होंने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों को रोकने का आदेश दिया है।



इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान तब तक बातचीत नहीं करेगा जब तक उसके युद्ध संबंधी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर हमलावरों के लिए मार्ग बंद रहेगा।



काबुल में ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की चेतावनी के बाद उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले की योजना को टाल दिया। ट्रंप के बयान पर ईरान ने कहा कि अमेरिका हमारी चेतावनी से डर गया और अपनी योजना में बदलाव किया।


ईरान की न्यूज एजेंसी तसनीम ने बताया कि जब तक 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' जारी रहेगा, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध-पूर्व की नहीं होगी।


ट्रंप का बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों पर किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को अगले पांच दिनों के लिए रोक दिया जाए। यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच हाल की सकारात्मक बातचीत के बाद लिया गया है।


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि दोनों देशों के बीच तनाव को समाप्त करने के लिए गंभीर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत का रुख सकारात्मक है, इसलिए हमलों को अस्थायी रूप से टालने का निर्णय लिया गया है।


उन्होंने यह भी कहा कि आगे की बातचीत की प्रगति के आधार पर ही अगले कदम तय होंगे। यह ध्यान देने योग्य है कि इससे एक दिन पहले ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। हालिया घटनाक्रम से संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अब तीखी बयानबाजी से आगे बढ़कर कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।