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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: पाकिस्तान में सुलह की कोशिशें

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान को मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान दौरे की संभावनाएं हैं, जहां वे ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता कर सकते हैं। व्हाइट हाउस ने भी ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान की प्रगति की जानकारी दी है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

तनाव का बढ़ता प्रभाव

नई दिल्ली - ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। अमेरिका युद्ध समाप्त करने की अपनी शर्तें लागू करना चाहता है, जबकि ईरान अपनी स्थिति पर अड़ा हुआ है। इस बीच, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सुलह कराने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान दौरे की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उपराष्ट्रपति वेंस ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान में वार्ता करने जा सकते हैं। एक प्रमुख मीडिया चैनल ने बताया कि पाकिस्तान ने खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने के बाद इस्लामाबाद में एक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है।


अमेरिकी अधिकारियों की बैठक

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेडी वेंस संभवतः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पाकिस्तान का दौरा करेंगे। इससे पहले, एक प्रमुख समाचार पत्र ने बताया था कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने ट्रंप से बातचीत की थी। इसके अलावा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी चर्चा की।


व्हाइट हाउस की स्थिति

व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान अपने लक्ष्यों के करीब पहुंच रहा है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया को बताया कि अमेरिका 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के मुख्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन हफ्तों में यह स्पष्ट हो गया है कि यह अभियान एक महत्वपूर्ण सैन्य सफलता साबित हुआ है।


सैन्य अभियान की सफलता

लेविट ने बताया कि अब तक 9,000 से अधिक दुश्मन ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं और ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के 140 से अधिक नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी नौसेना के सबसे बड़े विनाश के रूप में वर्णित किया गया है।