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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की चेतावनी का कड़ा जवाब दिया है, जबकि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं। इस बीच, ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है। जानें इस तनाव का क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव क्या हो सकता है।
 

ईरान की प्रतिक्रिया


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ईरान की अवसंरचनाओं पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा।


डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर दागी गई हर मिसाइल या ड्रोन के जवाब में अमेरिका ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र पर हमला करेगा।


अराघची ने कहा, "हमारा रक्षा सिद्धांत स्पष्ट है, आंख के बदले आंख। ईरान या उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई का शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना लगातार 12वें दिन ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रही है।


अमेरिकी हमले और ईरानी प्रतिक्रिया

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने 22 जुलाई की रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में समुद्री सैन्य क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया।


सेंटकॉम ने यह भी बताया कि इस महीने समुद्री नाकेबंदी फिर से शुरू होने के बाद से अमेरिकी बलों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।


ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी सेना ने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। जॉर्डन की सेना ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।


ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले ईरान पर अमेरिका के लगातार हमलों के जवाब में किए गए।


क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक प्रभाव

युद्ध अब लाल सागर तक फैल गया है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए हैं। सऊदी अधिकारियों ने एक टैंकर को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है।


ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान को तेल निर्यात से रोका गया, तो क्षेत्र के अन्य देशों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।


अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।


इस बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हुआ है, और कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।