ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष में एफ-35 विमान गिराया गया
संघर्ष की तीव्रता में वृद्धि
नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के 35 दिन बीत चुके हैं, और स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस दौरान, ईरान ने एक अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान को गिराने का दावा किया है। विमान के गिरने से पहले पायलट ने सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफलता पाई, और कहा जा रहा है कि वह ईरान के क्षेत्र में कहीं मौजूद है। अमेरिका ने पायलट की खोज के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस बीच, ईरान ने पायलट को हिरासत में लेने की खबरों का खंडन किया है, जो पहले से ही उड़ान के बाद बंधक बनाए जाने की अफवाहों का हिस्सा बन गया था।
ईरान का दावा और अमेरिकी प्रतिक्रिया
ईरान ने शुक्रवार को गिराए गए विमान के मलबे की तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें दावा किया गया है कि यह अमेरिकी एफ-35 का है। रिपोर्टों के अनुसार, पायलट ने कूदकर अपनी जान बचाई और वह ईरान के अंदर कहीं उतरा। अमेरिकी सेना ने कोहगिलुयेह और बोयेर अहमद जिले में पायलट की खोज के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया है, जिसमें ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और सी 130 हरक्यूलिस विमान शामिल हैं।
ईरान की चेतावनी
अमेरिकी विमान को गिराने के बाद, ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने उनके नागरिक ढांचे पर हमले जारी रखे, तो वे पूरे मध्य पूर्व में दोनों देशों के ठिकानों को निशाना बनाएंगे। ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा, 'यदि हमारे पुल, बिजली घर या ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया, तो हम आपके सभी ठिकानों को समाप्त कर देंगे।' ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले भी जारी रखे हैं, जिसमें कुवैत के मीना अल अहमदी पोर्ट पर स्थित ऑयल रिफाइनरी पर तीसरी बार हमला किया गया है।
इजराइल की स्थिति
इजराइल ने भी हमले जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वे अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि इजराइल ने ईरान की 70 प्रतिशत स्टील उत्पादन क्षमता को समाप्त कर दिया है, जिससे उसकी सैन्य शक्ति प्रभावित होगी। नेतन्याहू ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रखने की बात कही।
अमेरिका का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के बाद से होरमुज की खाड़ी के बारे में कई बयान दिए हैं। उनका हालिया बयान यह है कि यदि थोड़ा और समय मिला, तो अमेरिका आसानी से होरमुज की खाड़ी को खोल सकता है, जिससे तेल की सप्लाई शुरू होगी और दुनिया को बड़ा लाभ होगा। हालांकि, ब्रिटेन सहित 60 से अधिक देशों ने पहले ही होरमुज की खाड़ी को खोलने के प्रयास किए हैं।