ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर ट्रंप का अस्वीकार, तनाव बढ़ा
समझौते पर ट्रंप की मंजूरी का अभाव
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मंजूरी नहीं दी है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में समझौते का मसौदा देखने के बाद भी ट्रंप ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिससे ईरान में नाराजगी फैल गई है। ईरान ने आरोप लगाया है कि ट्रंप ने फिर से धोखा दिया है।
ईरान का आरोप और ट्रंप की रणनीति
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई ने ट्रंप पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप ने समुद्री नाकेबंदी जारी रखकर और बातचीत में अत्यधिक मांगें रखकर यह साबित किया है कि उनका बातचीत में कोई रुचि नहीं है।
इस बीच, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ट्रंप ईरान के साथ समझौते को लेकर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप ऐसा समझौता चाहते हैं, जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
समझौते की संभावनाएं और ईरान का रुख
अमेरिकी मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम समझौते के तहत ईरान को 300 अरब डॉलर का पैकेज दिया जा सकता था। इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों को ईरान में निवेश की अनुमति भी मिल सकती थी। हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि दोनों देश परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के करीब हैं, लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि वर्तमान में परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं चल रही है।