ईरान का नया मिसाइल हमला: 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर निशाना
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पहले ये हमले केवल मध्य पूर्व तक सीमित थे, लेकिन अब ये विभिन्न क्षेत्रों में फैलने लगे हैं। हाल ही में, ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने पर हमला किया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान ने 'डिएगो गार्सिया' पर कम से कम दो मिड-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यह स्थान अमेरिका और ब्रिटेन का एक संयुक्त सैन्य बेस है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक मिसाइल उड़ान के दौरान विफल हो गई, जबकि दूसरी मिसाइल एक अमेरिकी इंटरसेप्टर से टकरा गई। डिएगो गार्सिया, जो कि इक्वेटर के दक्षिण में मध्य हिंद महासागर में स्थित है, पर ईरान ने अपने देश से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर हमला किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरानी मिसाइलों की रेंज पहले की अपेक्षा कहीं अधिक है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले महीने कहा था कि उनकी मिसाइलों की रेंज 2,000 किलोमीटर तक सीमित है। लेकिन हालिया हमले ने ईरान की मिसाइल क्षमता के बारे में कुछ और ही संकेत दिए हैं। यदि ईरान के पास 2,000 किमी से अधिक दूरी की मिसाइलें नहीं हैं, तो फिर उसने डिएगो गार्सिया पर हमले के लिए कौन सी मिसाइल का उपयोग किया? इस पर ईरानी अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
भारत से डिएगो गार्सिया की दूरी लगभग 1,800 किलोमीटर है। अमेरिका और ब्रिटेन इस एयरबेस का उपयोग एशिया और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए करते हैं। यह अमेरिका के लिए एशिया और पश्चिम एशिया में सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां से बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल जहाज तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा, यहां विशाल ईंधन भंडारण, रडार सिस्टम और नियंत्रण टावर भी हैं, जो लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को संभव बनाते हैं।
ईरान के इस हमले ने कई स्तरों पर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि ईरान ने अपने प्रतिकूलों को एक बड़ा झटका दिया है।