ईरान का मनोबल: अमेरिका के खिलाफ संघर्ष में मजबूती
ईरान की प्रतिरोधक क्षमता
17 दिनों से जारी संघर्ष में ईरान ने दिखाई दृढ़ता
ईरान ने पिछले 17 दिनों से लगातार हमलों का सामना किया है, लेकिन वह हार मानने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसमें उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित कई प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया। हालांकि, ईरान ने जवाबी हमले किए और युद्ध को और भड़काने में सफल रहा।
ईरान ने उन खाड़ी देशों पर भी हमले किए, जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने स्थित हैं। इसके परिणामस्वरूप, ईरान ने अमेरिकी और इजरायली बलों को लगातार झटके दिए हैं, जिससे यह संघर्ष अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरानी सैनिकों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी है, लेकिन ईरानी सेना का मनोबल अभी भी मजबूत बना हुआ है।
खामेनेई के बाद का नेतृत्व
मोजतबा खामेनेई का उदय
खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हुआ, लेकिन किसी बाहरी समर्थित नेता का उभरना संभव नहीं हुआ। अमेरिकी विश्लेषकों ने पहले सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कट्टरपंथी धड़े ने खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई को आगे किया, जिसे ट्रंप ने नेतृत्व में नहीं देखना चाहा। हालाँकि, मोज्तबा की सेहत को लेकर भी सवाल उठे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, सर्वोच्च नेता बनने के बाद उनका पहला संदेश गुरुवार को प्रसारित किया गया।
आईआरजीसी की प्रतिशोध की योजना
बदले की भावना से प्रेरित
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अपने शीर्ष कमांडरों की हत्याओं का बदला लेने की योजना बना रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आईआरजीसी भी उसी तरह की प्रतिक्रिया देगी, जैसे अमेरिकी सैनिक अपने नेतृत्व की हत्या पर करते हैं। ईरान ने इस संघर्ष को सहनशक्ति की परीक्षा में बदल दिया है और वह इसमें टिके रहने की स्थिति में है।
अमेरिका का हमला: जल्दबाजी में निर्णय?
इजरायली खुफिया जानकारी पर आधारित कार्रवाई
इजरायल की खुफिया जानकारी और डिकैपिटेशन स्ट्राइक पूरी तरह सफल नहीं हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने इजरायली खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने का निर्णय लिया। 28 फरवरी को खामेनेई की मृत्यु ने नई चुनौतियों को जन्म दिया है।