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ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर अधिकार: अमेरिका के साथ समझौते पर प्रतिक्रिया

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार को स्पष्ट किया है, यह कहते हुए कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में 60 दिनों की छूट केवल अस्थायी है। संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने इस क्षेत्र को ईरान का हिस्सा बताया और कहा कि वे अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे। इस बीच, अमेरिका-ईरान समझौते की शर्तों में देरी के कारण ईरान में नाराजगी बढ़ रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

ईरान की स्थिति स्पष्ट

नई दिल्ली। ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस पर उसका अधिकार बना रहेगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में समुद्री सेवाओं के टोल में 60 दिनों की छूट केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।


गालीबाफ ने ईरानी सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि होर्मुज ईरान के क्षेत्रीय जल का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यह नहीं कह सकता कि ईरान ने इस जलडमरूमध्य का सैन्यीकरण कर दिया है। गालीबाफ ने जोर देकर कहा कि ईरान ने होर्मुज पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने इसे युद्ध के दौरान ईश्वर का उपहार बताया।


अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) की शर्तों के लागू होने में देरी के बीच, ईरान के शीर्ष नेता दोहा जाने से बच रहे हैं। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता एलेक्स वातांका ने कहा कि ईरान में इस समझौते को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि ईरान के लोग सवाल उठा रहे हैं कि विदेशों में फंसी संपत्तियां अब तक क्यों नहीं मिलीं, होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण क्यों नहीं मिला और इजराइल अब भी लेबनान में क्यों मौजूद है।


वातांका के अनुसार, कुछ लोगों का मानना है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालीबाफ ट्रम्प प्रशासन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जबकि अमेरिका अपने वादे पूरे नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि 17 जून को हुए MoU को लागू करने का समय तेजी से निकल रहा है। ऐसे में अराघची और गालीबाफ जैसे वरिष्ठ नेता दोहा जाकर कैमरे के सामने आने से बच रहे हैं, क्योंकि अगर समझौते के नतीजे नहीं मिले तो उन्हें अपने देश में आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।