ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी नाकेबंदी का प्रभाव
तेहरान की आर्थिक स्थिति
तेहरान: अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ईरान को अब तक 6 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका है। पिछले महीने, ईरान का कच्चा तेल निर्यात छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की थी, और ट्रंप प्रशासन अभी भी शांति समझौतों की शर्तों को मानने का दबाव बना रहा है। तेहरान ने इसे अवैध बताते हुए अमेरिकी जहाजों को जब्त करने की कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया है।
ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि
इस तेल आपूर्ति के ठप होने से वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से निर्यात में भारी कमी आई है। हालांकि, नाकेबंदी से पहले, ईरान ने अपने तेल निर्यात को बनाए रखने में सफलता प्राप्त की थी, जिससे उसे लाभ हुआ। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है, और ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि ईरान कब तक इस संघर्ष को जारी रख पाएगा?
ईरान के तेल निर्यात पर प्रभाव
ईरान के तेल निर्यात पर क्या असर पड़ा है?
ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, मई में ईरान का कच्चा तेल और कंडेनसेट निर्यात लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन से घटकर 3 लाख बैरल प्रति दिन से भी कम हो गया। Kpler ने नाकेबंदी शुरू होने से पहले के 40 दिनों के आंकड़ों का उपयोग किया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ईरान के कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर रहीं और कभी-कभी $100 से भी अधिक हो गईं।
अमेरिका के सामने ईरान की स्थिति
अमेरिका के सामने कब तक डटा रहेगा ईरान?
‘लॉयड्स लिस्ट’ के आंकड़ों के अनुसार, मार्च की तुलना में मई में ईरान की तेल से होने वाली कमाई लगभग 84 प्रतिशत कम हो गई। ईरान को अप्रैल और मई में 5.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट में Kpler ने बताया है कि नाकेबंदी के कारण ईरान से बाहर जाने वाले नए तेल की मात्रा में भारी कमी आई है, लेकिन हो सकता है कि इसमें खरीदारों तक पहुंचने वाले सभी ईरानी तेल का हिसाब न हो।
ईरान का तेल उत्पादन
क्या ईरान अभी भी तेल का उत्पादन कर रहा है?
ईरान कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा है, लेकिन उसे इसे स्टोर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि वह इसे बेच नहीं पा रहा है। एनर्जी पॉलिसी रिसर्चर और कंसल्टेंट मार्क अयूब ने अल जज़ीरा को बताया है कि ‘ईरान अपनी बची हुई स्टोरेज क्षमता का रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहा है। डेटा के अनुसार, नाकेबंदी प्रभावी है, लेकिन असली दबाव तब बनेगा जब स्टोरेज खत्म होने लगेगा। इसका मतलब है कि जब ईरान के पास तेल स्टोर करने की क्षमता खत्म हो जाएगी, तो उसे मजबूरी में उत्पादन बंद करना होगा।