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ईरान की चेतावनी: फारस की खाड़ी को बंद करने की तैयारी

ईरान ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि उसके तटीय क्षेत्रों पर हमला किया गया, तो वह फारस की खाड़ी को बंद कर सकता है। इस स्थिति में समुद्री मार्गों पर बारूदी सुरंगें बिछाने की बात कही गई है। अमेरिका ने भी चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया गया, तो वह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कार्रवाई करेगा। जानें इस स्थिति का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा।
 

ईरान का कड़ा रुख

तेहरान/लंदन/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके तटीय क्षेत्रों या द्वीपों पर हमला किया गया, तो वह फारस की खाड़ी को पूरी तरह से बंद कर सकता है। ईरान की रक्षा परिषद ने संकेत दिए हैं कि ऐसी स्थिति में समुद्री मार्गों पर बारूदी सुरंगें बिछाकर आवागमन को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।


समुद्री मार्गों पर नियंत्रण

ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए गैर-युद्धरत देशों को तेहरान के साथ समन्वय करना होगा। परिषद ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में फारस की खाड़ी और तटीय क्षेत्रों के सभी समुद्री रास्तों और संचार लाइनों को अवरुद्ध कर दिया जाएगा।


हमले की जिम्मेदारी

ईरान ने अपने बयान में कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो पूरी खाड़ी प्रभावी रूप से बंद हो जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार वह पक्ष होगा, जो पहले हमला करेगा। इससे पहले भी ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद करने की चेतावनी दी थी।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कार्रवाई करेगा।


ब्रिटेन और अमेरिका के बीच वार्ता

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच इस मुद्दे पर फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना आवश्यक बताया।


वैश्विक नौवहन पर प्रभाव

इस जलमार्ग से गुजरने वाला समुद्री यातायात युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 95% तक गिर चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है।


NATO की भूमिका

NATO की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गठबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि वह इस जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और चालू कराने में सक्षम होगा, हालांकि इसके लिए सदस्य देशों को कुछ समय लगेगा।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा।