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ईरान की बारूदी सुरंगों की समस्या से जूझता होर्मुज जलडमरूमध्य

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच, ईरान की बारूदी सुरंगों की समस्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नई जटिलता पैदा कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान इन सुरंगों को न तो खोज पा रहा है और न ही हटाने की क्षमता रखता है। इस मुद्दे ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में बाधा उत्पन्न की है। क्या यह स्थिति वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करेगी? जानें इस जटिल संकट के बारे में अधिक जानकारी।
 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव की नई परत

तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संबंध में एक नई जटिलता उभरकर सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह से खोलने में असमर्थ है, क्योंकि उसने पहले जो समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, उन्हें न तो पूरी तरह से खोज पा रहा है और न ही हटाने की क्षमता रखता है।


यह मुद्दा इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में एक बड़ी बाधा बन गया है। इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। दोनों पक्ष युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर गतिरोध बना हुआ है।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।


रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में छोटे जहाजों के माध्यम से इस क्षेत्र में अनियमित तरीके से बारूदी सुरंगें बिछाईं। कई सुरंगों का रिकॉर्ड नहीं रखा गया, और कुछ अपनी जगह से बह गईं या हट गईं। इससे अब उनकी सही स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। IRGC ने चेतावनी दी है कि जहाज इन सुरंगों से टकरा सकते हैं। हालांकि कुछ सीमित सुरक्षित मार्गों के नक्शे जारी किए गए हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं माने जा रहे।


अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि दो सप्ताह का युद्धविराम तभी संभव है जब होर्मुज को “पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित” रूप से खोला जाए। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए ही मार्ग खोला जा सकेगा।


अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि “तकनीकी सीमाएं” वास्तव में बारूदी सुरंगों को खोजने और हटाने में ईरान की अक्षमता को दर्शाती हैं। यही कारण है कि वार्ता में अमेरिका अधिक सुरक्षित समुद्री मार्गों की मांग कर रहा है, जबकि ईरान अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दे रहा है।


यह संकट फरवरी-मार्च 2026 में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद उत्पन्न हुआ। युद्ध की शुरुआत में ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई।


फिलहाल दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान शर्तों का पालन नहीं कर रहा, जबकि ईरान का आरोप है कि इजरायल लेबनान में हमले जारी रखे हुए है।


विशेषज्ञों के अनुसार, बिखरी हुई बारूदी सुरंगों के कारण इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाना आसान नहीं है। यदि जल्द ही सुरक्षित आवागमन बहाल नहीं हुआ, तो वैश्विक तेल कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है।