ईरान की सैन्य तैयारी: खामेनई के उत्तराधिकारियों का संदेश
ईरान की सैन्य गतिविधियाँ
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनई के उत्तराधिकारियों ने इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वे लंबी अवधि की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
यह एक विडंबना है कि जब ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन हमद अल बुसेइदी ने यह जानकारी दी कि ईरान संवर्धित यूरेनियम के भंडार को समाप्त करने पर सहमत हो गया है, उसी समय अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से यह स्पष्ट होता है कि उनका लक्ष्य केवल ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है, ताकि पश्चिम एशिया में इजराइल को चुनौती देने वाला कोई देश न रहे। इस हमले में ईरान के धार्मिक नेता खामेनई की मौत भी हुई।
हालांकि, यह स्पष्ट है कि ईरान के इस्लामी शासन ने उत्तराधिकार की एक मजबूत व्यवस्था बनाई है, जिसमें आपातकालीन उत्तराधिकार भी शामिल है। खामेनई के उत्तराधिकारियों ने इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके यह संदेश दिया है कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। कोरिया और वियतनाम युद्धों के बाद, यह पहली बार है जब किसी शक्ति ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर इस तरह से बेखौफ होकर हमला किया है।
इस बीच, पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के खतरे में है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप की 'छोटी और निर्णायक' लड़ाई की योजना अब कम ही संभव लगती है। बिना तख्ता पलट के, ट्रंप अपनी जीत का कैसे एलान करेंगे, यह स्पष्ट नहीं है। इस रणनीतिक अस्पष्टता के कारण यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा। ईरान ने होरमुज खाड़ी और यमन स्थित अंसारुल्लाह (हूती) द्वारा लाल सागर को बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके गंभीर वित्तीय और आर्थिक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।