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ईरान के खिलाफ अमेरिका का नया रणनीतिक कदम: खर्ग द्वीप पर कब्जा

अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के खिलाफ चल रही जंग ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर रखा है, जिससे कई तेल और गैस शिप फंसे हुए हैं। इस बीच, अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की योजना बनाई है, जो ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण तेल केंद्र है। जानें इस रणनीति के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकट

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकट: अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के खिलाफ चल रही जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पिछले तीन हफ्तों से पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर रखा है। इस स्थिति के कारण कई तेल और गैस ले जाने वाले जहाज फंसे हुए हैं। ईरान ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है और कतर, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल में तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले कर रहा है। इस बीच, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक खतरनाक योजना बनाई है।


एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मजबूर करने के लिए खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की योजना बनाई है। यह द्वीप ईरान के दक्षिणी तट से लगभग 25-30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसे तेल का मुख्य केंद्र माना जाता है, जहां से ईरान को 90 प्रतिशत तेल प्राप्त होता है। पर्शियन गल्फ के बीच में स्थित होने के कारण यह द्वीप रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर हवाई हमले किए थे, जिसमें 90 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिनमें मिसाइल भंडारण बंकर और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे।


रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बनाने के लिए खर्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसकी घेराबंदी करने की योजना बना रहा है। यदि अमेरिकी सैनिकों ने खर्ग द्वीप पर कब्जा कर लिया, तो यह सीधे तौर पर हमले की स्थिति में आ जाएगा। यह ऑपरेशन तब शुरू होगा जब अमेरिकी सेना होर्मुज के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर कर देगी। यदि इस प्रकार के किसी ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो इसके लिए और अधिक अमेरिकी सैनिकों की आवश्यकता होगी।