ईरान के दो प्रमुख कमांडरों की इजरायल हमले में मौत
ईरानी मीडिया ने पुष्टि की
तेहरान: अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के चलते ईरान को 28 फरवरी के बाद 17 मार्च को एक बड़ा झटका लगा। इस दौरान इजरायल के हमले में बासिज फोर्स के दो कमांडर, गुलामरेजा सुलेमानी और अली लारीजानी, मारे गए। ईरानी राष्ट्रीय मीडिया ने इस घटना की पुष्टि की है। इससे पहले 28 फरवरी को हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर समेत 48 नेताओं की जान गई थी।
कमांडरों की भूमिका
गुलामरेजा सुलेमानी और अली लारीजानी को जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जाता था। इनकी हत्या ऐसे समय में हुई है जब ईरान युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। इजरायल और अमेरिका के हमलों को इस्लामिक गणराज्य के लिए हाल के दशकों की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इजरायल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने दावा किया कि सुलेमानी और लारीजानी को एक रात पहले ही मार गिराया गया।
लारीजानी की महत्वपूर्ण भूमिका
लारीजानी को देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पहले संसद के अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार रह चुके हैं। उन्होंने परमाणु वार्ता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने जनरल सुलेमानी पर प्रतिबंध लगाए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप था। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सरकार को कमजोर करना है।
ईरान की राजनीतिक स्थिरता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि किसी एक या दो शीर्ष नेताओं की हत्या से देश की राजनीतिक व्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान की राजनीतिक प्रणाली मजबूत संस्थाओं पर आधारित है, इसलिए किसी व्यक्ति के जाने से सिस्टम नहीं हिलता।